स्वीकार और आत्मसम्मान की ओर एक सफर जीवन में एक समय ऐसा आता है जब इंसान हर परिस्थिति को स्वीकार करना सीख जाता है। वह समझ जाता है कि हर चीज़ उसकी इच्…
तो समझ लेना—अब मैं पहले जैसी नहीं मेरे बदले लहजे को सबने देखा, मेरे कठोर शब्दों को सबने सुना, पर जो मैंने जो सुना और सहा चुपचाप, उसे न किसी ने देखा, …
शिक्षक का स्थान सर्वोच्च क्यों है? हमारी ज़िंदगी में अगर किसी का स्थान सबसे खास और अनोखा है, तो वह है—शिक्षक का। शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान ही …
समझ की उम्र दसवीं बोर्ड परीक्षा खत्म होते ही मेरे बेटे ने मुझसे कहा, “मम्मी, चलो मूवी देखने च लते हैं।” मैंने सहज ही पूछा, “अभी तो कोई खास फिल्म ल…
चमक नहीं, सादगी जोड़ती है दिलों को आज के समय में हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में “चमक” पाने की कोशिश कर रहा है। कोई अपने कपड़ों से, कोई अपने शब्दों …
“हम इंसान हैं… हमें कोने का इंतज़ार नहीं।” कभी देखा है किसी कुत्ते को? अगर उसे बिना कारण डराया जाए, तो वह अपनी गलती जाने बिना ही डर के मारे तेज़ भाग…
अब और मत सहो! हमने सहना अपनी आदत बना लिया है। गलत बातों को अनदेखा कर देना, अपमान को चुपचाप भीतर उतार लेना, और हर बार खुद को ही समझा लेना — “छोड़ो, …
एक माँ का मन,बच्चों के परीक्षा के दौरान आ ज से माशिमं की बोर्ड परीक्षा शुरू हो गई। सुबह जब मैं अपनी बेटी को उसके सेंटर — लाला लाजपतराय स्कूल — लेकर …
शादी-ब्याह में प्रदर्शन और अन्न का अपमान शादी-ब्याह जैसे पवित्र और संस्कारपूर्ण आयोजनों में आज आर्थिक प्रदर्शन की अंधी होड़ लग गई है। “मेरी कमीज ते…
श्रीकृष्ण और भारतीय पर्यावरण-दर्शन : एक सांस्कृतिक विमर्श भा रतीय दर्शन में पर्यावरण कोई बाहरी विषय नहीं, बल्कि जीवन की आत्मा है। प्रकृति और पुरुष, ज…
श्यामवर्ण : सौंदर्य नहीं, ईश्वरीय शाश्वतता का प्रतीक भारतीय सभ्यता में सौंदर्य की परिभाषा कभी केवल त्वचा के रंग तक सीमित नहीं रही। यहाँ सौंदर्य का मू…
“डिग्री और चूल्हे के बीच खड़ी एक शिक्षिका” मेरी शिक्षिका बहनों को समर्पित लोग कहते हैं— अध्यापिका की नौकरी आसान होती है, छुट्टियाँ ज़्यादा होती हैं।…
“मैं से हम तक की यात्रा” राजीव और सविता एक ही कक्षा में पढ़ते थे, पर दोनों की सोच में बड़ा अंतर था। राजीव अपने मध्यावकाश का भोजन अकेले करना पसंद कर…
भक्ति मार्ग की आधारशिला : यम और नियम भारतीय दर्शन में भक्ति मार्ग को आत्मिक उन्नति का सहज और मधुर पथ माना गया है। किंतु इस मार्ग पर स्थिर और सफलताप…
आतुरता और पूर्णता का भ्रम : युवा ऊर्जा के लिए एक चेतावनी कु म्हार के चाक पर चढ़ा कच्चा घड़ा धैर्य की माँग करता है। यदि उसे पूरी तरह आकार लेने से पहले…
आत्म-प्रतिस्पर्धा : स्वयं से बेहतर बनने की यात्रा म नुष्य स्वभाव से जिज्ञासु और गतिशील प्राणी है। समाज में रहते हुए वह न केवल जीवन यापन करता है, बल्क…
कानून का उद्देश्य न्याय है, वैमनस्य नहीं प हचान से ऊपर इंसानियत और अधिकारों के साथ जिम्मेदारी— यही भारत की असली ताक़त है।अगर किसी देश में जातियाँ ज…
छिद्रान्वेषण : दूसरों में दोष खोजने की आदत य ह मनुष्य की एक सामान्य लेकिन घातक प्रवृत्ति है—दूसरों में कमियाँ ढूँढ़ना। इसी प्रवृत्ति को छिद्रान्वेष…
संसार : चरित्र-निर्माण की विराट साधनभूमि सं सार न तो शुभ है, न अशुभ। वह स्वयं में पूर्ण, संतुलित और निर्विकार है। मनुष्य अपनी चेतना, मनःस्थिति और दृष…
छोटे संकल्प, बड़ी उड़ान जी वन में संकल्प का वही स्थान है, जो पूजा में जल का। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत संकल्प के बिना अधूरी मानी जाती है। जब तक म…
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