तो समझ लेना—अब मैं पहले जैसी नहीं।

तो समझ लेना—अब मैं पहले जैसी नहीं


मेरे बदले लहजे को सबने देखा,

मेरे कठोर शब्दों को सबने सुना,

पर जो मैंने जो सुना और सहा चुपचाप,

उसे न किसी ने देखा, न किसी ने सुना।

अतीत की हर चोट की गवाह मैं ही रही,

हर गलत के खिलाफ खड़ी मैं ही रही,

जब सहना छोड़ दिया मैंने,

तो मेरे ही शब्दों को गलत कहा गया।

काश कोई ये भी समझ पाता,

कि ये सख्ती यूँ ही नहीं आई,

ये उस दर्द की आवाज़ है,

जो बरसों तक चुप रहकर भी दब न पाई।

पर इस दुनिया को तो वही भाता है,

जो चुप रहे, सहता जाए,

औरत हो तो बस झुकी रहे,

अपने हक़ में भी कुछ न कह पाए।

मैं बदली हूँ, क्योंकि ज़रूरी था,

अब हर गलत पर चुप रहना नहीं,

अगर मेरी आवाज़ कड़वी लगती है,

तो समझ लेना—अब मैं पहले जैसी नहीं।

@vandanavaani 

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