“हम इंसान हैं… हमें कोने का इंतज़ार नहीं।”

 “हम इंसान हैं… हमें कोने का इंतज़ार नहीं।”

कभी देखा है किसी कुत्ते को?

अगर उसे बिना कारण डराया जाए,

तो वह अपनी गलती जाने बिना ही

डर के मारे तेज़ भागने लगता है।

उसे दौड़ाते रहो…

वह भागता ही रहेगा।

उसे समझ नहीं आता

उसकी भूल क्या है,

बस जान बचानी है — यही समझ आता है।

लेकिन जैसे ही उसे एक कोना मिल जाता है,

जहाँ से आगे कोई रास्ता नहीं बचता —

वह पलटता है।

अब डर खत्म नहीं होता,

पर भागने की जगह खत्म हो जाती है।

और जब भागने की जगह खत्म हो जाए,

तो जवाब देना मजबूरी नहीं, स्वाभिमान बन जाता है।

ऐसे ही हम इंसान हैं।

सच के साथ चलते हुए भी

अगर हमें बार-बार दौड़ाया जाए,

तो हम भी दौड़ते ही रहते हैं।

लोगों की आदत होती है —

जो जितना भागेगा,

उसे उतना ही दौड़ाया जाएगा।

क्योंकि उन्हें लगता है

यह कभी पलटेगा नहीं।

लेकिन याद रखिए —

हम इंसान हैं।

हमें उस कोने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए

जहाँ हमारी पीठ दीवार से लग जाए।

हमें पलटना सीखना होगा

उससे पहले कि हमें मजबूर किया जाए।

हमें जवाब देना सीखना होगा

उससे पहले कि हमें घेरा जाए।

सच के साथ चलना कमजोरी नहीं है,

और चुप रहना कायरता नहीं।

पर अपनी चुप्पी को

किसी की हिम्मत मत बनने दीजिए।

क्योंकि इंसान अगर ठान ले,

तो उसे कोने की जरूरत नहीं पड़ती —

वह खुले मैदान में भी

सीधा खड़ा हो सकता है।

#स्वाभिमान #सचकीताकत #चुप्पीकीसीमा #आत्मसम्मान #StrongMessage #vandanavaani

Post a Comment

0 Comments