स्वीकार और आत्मसम्मान की ओर एक सफर जीवन में एक समय ऐसा आता है जब इंसान हर परिस्थिति को स्वीकार करना सीख जाता है। वह समझ जाता है कि हर चीज़ उसकी इच्…
तो समझ लेना—अब मैं पहले जैसी नहीं मेरे बदले लहजे को सबने देखा, मेरे कठोर शब्दों को सबने सुना, पर जो मैंने जो सुना और सहा चुपचाप, उसे न किसी ने देखा, …
राज्यस्तरीय ‘छत्तीसगढ़ महतारी अलंकरण सम्मान’ से सम्मानित हुईं व्याख्याता ज्योति सराफ रायपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर नवसृजन मंच द्वा…
शिक्षक का स्थान सर्वोच्च क्यों है? हमारी ज़िंदगी में अगर किसी का स्थान सबसे खास और अनोखा है, तो वह है—शिक्षक का। शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान ही …
समझ की उम्र दसवीं बोर्ड परीक्षा खत्म होते ही मेरे बेटे ने मुझसे कहा, “मम्मी, चलो मूवी देखने च लते हैं।” मैंने सहज ही पूछा, “अभी तो कोई खास फिल्म ल…
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