छोटे संकल्प, बड़ी उड़ान
जीवन में संकल्प का वही स्थान है, जो पूजा में जल का। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत संकल्प के बिना अधूरी मानी जाती है। जब तक मन में यह स्पष्ट न हो कि हमें क्या करना है और क्यों करना है, तब तक कदम आगे नहीं बढ़ते। संकल्प ही वह बीज है, जिससे प्रयास का वृक्ष जन्म लेता है।
संकल्प लेने के लिए इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है और संकल्प के बाद ही प्रयास की यात्रा प्रारंभ होती है। जब संकल्प दृढ़ होता है, तब प्रयास को साहस मिलता है और विजय का मार्ग स्वतः ही सरल होने लगता है। वास्तव में हमारी सफलता हमारी योग्यता से अधिक हमारे संकल्प की मजबूती पर निर्भर करती है। जितना गहरा विश्वास हम अपने संकल्प पर करते हैं, उतनी ही निकटता हमें सफलता से मिलती है।
यदि हमारा संकल्प विजय का है, तो पराजय हमें रोक नहीं सकती। संकल्प सकारात्मक ऊर्जा बनकर हमें निरंतर प्रेरित करता रहता है। इसलिए जीवन में बड़े-बड़े नहीं, बल्कि छोटे-छोटे संकल्प लेते रहना चाहिए। जब हम छोटे संकल्पों को पूरा करते हैं, तो आत्मविश्वास बढ़ता है और अपनी क्षमता पर विश्वास मजबूत होता जाता है। यही आत्मविश्वास आगे चलकर बड़े लक्ष्यों को संभव बनाता है।
दृढ़ संकल्प में असीम शक्ति छिपी होती है। यह व्यक्ति को हर प्रकार की बाधाओं, परिस्थितियों और असफलताओं से जूझने का सामर्थ्य देता है। किंतु संकल्प लेकर उसे भूल जाना भी मानव स्वभाव बन गया है। कई लोग रोज़ संकल्प लेते हैं, पर उसे निभा नहीं पाते, क्योंकि उनके संकल्प में दृढ़ता का अभाव होता है। संकल्प केवल सोचने का विषय नहीं, जीने की प्रक्रिया है।
वास्तव में सफल और असफल व्यक्ति के बीच न तो ज्ञान का बड़ा अंतर होता है और न ही योग्यता का। अंतर होता है तो केवल दृढ़ संकल्प का—और यही अंतर निर्णायक सिद्ध होता है। जो व्यक्ति संकल्प के साथ जीवन जीता है, वही सच्चा साधक होता है। दृढ़ संकल्प ही जीवन में सफलता प्राप्त करने का मूल मंत्र है।
डॉ वंदना पाण्डेय Adeo


0 Comments