क्यूआर कोडिड चार्टस् से मिलेगी छात्रों को विशेष जानकारी(एक अनूठा प्रयोग)

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#क्यूआर पेड़ पौधों वाला राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय सुशांत लोक बी 2 बना तीसरा स्कूल



अक्सर किसी भी सामान्य चार्ट में  फोटो ही होता है और फोटो देखने मात्र से छात्रों को कोई जानकारी प्राप्त हो जाए, यह सम्भव नहीं है । लेकिन अब क्यू-आर कोडिड चार्टस् से यह सम्भव है और इससे बच्चे को तुरंत व विस्तृत जानकारी मिल जाती है । यह अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है । 

गुरूग्राम जिले का रा. मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय सुशांत लोक बी 2 मैक्स, कन्हैई में क्यूआर कोडिड चार्टस् लगाए गए है । विद्यालय के शिक्षक विनोद शौकीन ने बताया कि आज विद्यालय की सभी कक्षाओं में एंव दरवाटजों पर क्यूआर कोडिड  चार्टस् को लगाया गया है । इन क्यूआर कोडिड चार्टस् से बच्चों को हर फोटो की जानकारी उसके नीचे लगे क्यूआर कोड को  मात्र स्कैन करने पर ही फोन में उपलब्ध हो जाएगी । 

शिक्षक विनोद शौकीन ने बताया कि इन विशेष क्यू-आर कोडिड चार्टस् में भारतीय प्रधानमंत्री, भारतीय राष्ट्रपति, हरियाणा के मुख्यमंत्री, हरियाणा के महान खिलाड़ी, भारतीय महान वैज्ञानिक,  भारतीय नदियाँ, मानव तंत्र,  फलदार पेड़, भारत का नक्शा, हरियाणा का नक्शा, कक्षा पहली से कक्षा पांचवी तक की सभी पाठ्यपुस्तकें कक्षावार क्यू-आर कोडिड चार्ट द्वारा बच्चों को आसानी से मिल पाएगी । इन क्यूआर कोड को बच्चे मोबाइल फोन द्वारा क्यूआर स्कैनर एप्प की सहायता से स्कैन कर इनके विषय में तुरंत व विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । विशेष रूप में भारत का नक्शा जिसमें सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के क्यूआर कोड , हरियाणा का नक्शा जिसमें सभी जिलों के क्यू-आर कोड निर्धारित स्थान पर नाम सहित दर्शाया गया है, ये क्यू-आर कोडिड नक्शे बड़े  ही आकर्षक बने हैं । 



राष्ट्रपति शिक्षक अवार्डी मनोज कुमार लाकड़ा ने बताया कि अध्यापक क्यूआर कोडिड चार्टस् को  शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में प्रयोग कर सकता है । 

अध्यापक अपने शिक्षण कार्य को रोचक तथा प्रभावशाली बनाने के लिए इन क्यूआर कोडिड चार्टस् का आसानी से  प्रयोग कर सकता है । यह बच्चों की रूचि के हिसाब से शिक्षण कार्य को अधिक सुबोध, रोचक व  प्रभावशाली  बनाता है ।


पेड़ पौधौं को भी मिला क्यूआर कोड

गुरूग्राम जिले का रा. मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय सुशांत लोक बी 2 मैक्स, कन्हैई के हर पेड़-पौधौं को क्यूआर कोड देने की अनोखी पहल भी की गई है । शिक्षक विनोद शौकीन ने बताया की आजकल बच्चों को पेड़-पौधौं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है । कई बार बच्चे पेड़ पौधों के नाम तक नहीं जानते । पेड़ पौधो पर क्यूआर कोड लगाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उस पेड़ पौधे के बारे में सही व रोचक जानकारी व वातावरण के प्रति जागरूक करना है । 


बच्चों को कम से कम अपने विद्यालय के हर पेड़- पौधों के नामों की सही जानकारी होनी चाहिए । पेड़-पौधों के नाम, वैज्ञानिक नाम, औषधीय गुण, लाभ-हानि, बीमारियों में महत्व, जलवायु, उगाने की विधि, फूल व पत्तियाँ, जड़ का महत्व, इन सभी प्रकार की जानकारियाँ अब विद्यार्थी  पेड़ों पर लगे क्यू-आर कोड ले सकेंगे ।  इन विशेष क्यू आर कोड या बारकोड से आप अपने स्मार्ट मोबाइल फोन का उपयोग करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पेड़-पौधौं के घरेलु नाम और वैज्ञानिक नाम के साथ-साथ अन्य जानकारी जैसे  पेड़- पौधे की उत्पत्ति कहां से हुई, पेड़ की देखभाल कैसे की जाए, पेड़ों का बीमारियों में उपयोग, धार्मिक महत्व, वातावरण, या उसका उपयोग इत्यादि की जानकारी संग्रहीत है । विद्यार्थी आसानी से क्यूआर कोड को स्कैन कर सकते हैं और फिर अपने फोन पर जानकारी स्टोर भी कर सकते हैं ।

विद्यालय के शिक्षक विनोद शौकीन ने बताया कि आजकल ग्लोबोलाइजेशन के कारण वातावरण दूषित होता जा रहा है । पेड़-पौधों से ही वातावरण को रहने योग्य बनाया जा सकता है। लेकिन पेड़-पौधों के बारे में सही जानकारी होना भी नितांत जरूरी है । पेड़-पौधों के क्यू-आर कोडिड जानकारी बच्चों को सुगम तरीके से दी जा सकती है । 



क्यूआर कोडिड चार्टस् व पेड़-पौधौं के क्यूआर कोड का निर्माण रा. व.  मा. विद्यालय बजघेड़ा गुरूग्राम में कार्यरत मौलिक मुख्याध्यापक मनोज कुमार लाकड़ा राष्ट्रीय शिक्षक अवार्डी 2020 (राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित शिक्षक)  के छात्र हिमांशु कक्षा बाहरवीं ने तैयार किए है ।  जिन्हें विशेष रूप से सरकारी मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय मैक्स बी 2 कैन्हैई में लगाया गया है । इससे पहले यह कार्य रा. व. मा. विद्यालय बजघेड़ा, रा. मॉडल संस्कृति प्रा.  विद्यालय बजघेड़ा, रा. व.  मा. विद्यालय बड़वासनी सोनीपत में भी लगाए जा चुके हैं । 


विद्यालय के शिक्षक विनोद शौकीन ने बताया कि विद्यालय के अध्यापक इन क्यूआर कोडिड चार्टस् का उपयोग टीएलएम यानि  शिक्षण सहायक सामग्री के तौर पर कर सकते है जिससे वे अपने शिक्षण कार्य में विद्यार्थियों के लिए नवीनता, ध्यान को केन्द्रित करना, शिक्षण में कुशलता, रोचकता, स्थाई ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास कर सकते है । विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम के दाखिले किए जा रहे हैं । छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है । फेस लिफ्टिंग ग्रांट से विद्यालय की दिवारों को शिक्षण सामग्री पेंट करवाई गई हैं जो बहुत ही आकर्षक बनी हैं । स्मार्ट क्लासरूम भी तैयार किया गया है । यह सरकारी विद्यालय प्राइवेट विद्यालयों को मात दे रहा है । अब इंतजार है तो बस विद्यालय के खुलने का और बच्चों के आने का ।

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