गोपालपुर गांव में एक प्राथमिक शाला थी, वहां एक शिक्षिका नेहा वर्मा थी जो बच्चों को लगन, मेहनत एवं ईमानदारी के साथ पढ़ाती थी और पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें व्यायाम, खेल- कूद, गीत- नृत्य आदि गतिविधियां भी कराती और बच्चे भी उसे बहुत स्नेह एवं प्यार देते थे,अगर किसी कारणवश मैडम छुट्टी में रहती तो बच्चे उसे बहुत याद करते विद्यालय उनके बिना अच्छा नहीं लगता, मैडम के विद्यालय में प्रवेश करते ही, बच्चे मैडम नमस्ते करके पैर छूकर प्रणाम करते और दौड़े आते, विद्यालय में हाई स्कूल भी थी प्राथमिक शाला एवं हाई स्कूल अलग अलग पाली में लगती थी एक दिन हाई स्कूल के शिक्षक श्याम दुबे जी आए, उसकी आठ साल की बेटी पूजा जो ब्लॉक के अंग्रेजी स्कूल में पढ़ती थी पूजा तीसरी कक्षा में पढ़ती थी और उसे वर्णमाला का ज्ञान भी ना था एक दिन श्याम दुबे सर प्राथमिक स्कूल में आए और उसने देखा प्राथमिक शाला में दूसरी कक्षा के बच्चे बहुत ही अच्छा पुस्तक पढ़ रहे हैं उन्हें मन में लालसा हुई कि काश मेरी बेटी भी इसी तरह से पुस्तक पढ़ लेती दुबे सर ने वर्मा मैडम को अपनी बेटी के बारे में बताया, ब्लॉक के बड़े अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने के बाद भी मेरी बेटी हिंदी वर्णमाला नहीं पढ़ पा रही है यहां के बच्चे कविता, कहानी आसानी से पढ़ ले रहे थे दुबे सर जी ने मैडम से अनुरोध किया कि आप मेरे बच्ची को भी पढ़ाएं दुबे जी ने ब्लॉक के अंग्रेजी स्कूल से पूजा को यही गोपालपुर के शासकीय प्राथमिक शाला में भर्ती कराया धीरे-धीरे पूजा में बहुत परिवर्तन आया वह कहानी, कविता को बहुत अच्छे ढंग से पढ़ ले रही है लिखने का सही ढंग आ गया, जब दुबे सर ने शासकीय प्राथमिक शाला में भर्ती कराया तो सभी ने उनका मजाक उड़ाया अंग्रेजी स्कूल को छोड़कर सरकारी स्कूल में क्यों भर्ती करा रहे हैं ब्लॉक में बहुत अच्छे अच्छे स्कूल है, वहां किसी स्कूल में उसे भर्ती करा देते, यहां क्यों भर्ती करा रहे हैं इस तरह से बोलकर बहुत लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, ब्लॉक से गोपालपुर की दूरी 10 किलोमीटर था दुबे जी रोज अपनी बेटी के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए आते और पूरा स्कूल टाइम तक वहां रुकते और छुट्टी होते ही उसे लेकर घर छोड़ने जाते और पुनः दुबे जी हाई स्कूल के शिक्षक थे वे फिर से अपनी ड्यूटी के लिए आते इस तरह से उन्होंने अपनी बेटी के लिए बहुत ही संघर्ष किया ताकि उसकी बेटी दूसरे बच्चों की तरह अच्छे से पुस्तक पढ़ ले पूजा इस वर्ष पांचवी कक्षा में अच्छे अंको से पास हुई वे हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी पढ़ने मे भी में अच्छी हो गई इसके लिए दुबे सर जी ने नेहा मैडम को बहुत बहुत धन्यवाद दिया कि उनकी लगन एवं मेहनत से आज उसकी बच्ची इतनी अच्छी पढ़ाई में है सरकारी स्कूल में भी नेहा वर्मा जैसे शिक्षिका एवं शिक्षक होते हैं जो अपनी मेहनत एवं लगन से मिट्टी को भी सोना बना देते हैं।
प्रस्तुति-श्रीमती धनमत साहू
शासकीय प्राथमिक शाला बेलटिकरी,
विकासखंड बिलाईगढ़, जिला- बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़)


0 Comments