जब सरकारी स्कूल का विद्यार्थी बना राज्य का टॉपर

परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ने वाले ही सच्चे पथिक होते है। 

कुशालपुर गांव में एक धनीराम नाम का व्यक्ति रहता था।जैसा उसका नाम था वैसा ही वह धनवान था।और एक गरीब दास नामक व्यक्ति रहता था जैसा इसका नाम था वैसा ही यह गरीब था ।दोनो एक दूसरे के पड़ोसी थे।दोनो का एक-एक बेटा था।धनीराम के बेटे का नाम रामू था धानीराम कहता कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई नही होता इसलिए रामू को एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया।और गरीबदास के बेटे का नाम स्यामू था ।गरीबदास तो बेचारा गरीब था उसने श्यामू को सरकारी स्कूल में दाखिला करा दिया।धनी राम को अपने बेटे पर बहुत घमंड था कि मैं अपने  बेटा को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता हु।और मेरा बेटा पूरे टिप-टॉप के साथ टाई ,बेल्ट ,जूता, मोजा, आई-कार्ड लगाकर जाता है और वह होशियार है कहता।लेकिन रामू तो      पढ़ाई में कमजोर था अच्छे अंक लाता ही नही था।जब रामू के शिक्षक पालक संपर्क में जाते तो धानीराम घर पर रहता ही नही था वह काम काज से बाहर जाया रहता और रामू की माँ रामू को डांट पड़ेगी करके मोह के कारण उसके पिताजी को कुछ नही बताती थी। कभी-कभी तो रामू स्कूल नही जाने के बहाने बनाता था।फिर भी धनीराम को बहुत घमंड था कि मैं अपने बेटे को कॉलेज तक प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ाऊंगा और मेरा बेटा पढ़-लिखकर एक बड़ा अफसर बनेगा कहकर गरीबदास बेचारे को ताना मरते रहता था।
                    उधर गरीबदास बेचारा क्या करता। वह अपने बेटे श्यामू को सरकारी स्कूल में दाखिला कराया था जो स्कूल में मिलता वही पहनकर जाता, जो भोजन मिलता उसी में खुश रहता और मन लगाकर पढ़ाई करता। पढ़ते समय जो समझ मे नही आता शिक्षक से बार-बार पूछता और पढ़ाई में होशियार था।
                   धीरे-धीरे समय बीतता गया रामू हमेशा तीसरे स्थान से पास होता और श्यामू प्रथम स्थान से पास होता था। फिर भी धनीराम का घमंड कम नही हो रहा था और हर वर्ष यही कहता कि रामू अगले वर्ष प्रथम स्थान से पास होगा। धनीराम तो अपने कारोबार में ही मग्न रहता था। जब 12वी कक्षा में रामू और श्यामू पहुँचे तो रामू  इस वर्ष भी तीसरे स्थान से पास हुआ और श्यामू 99% से पास हुआ और पूरे राज्य में प्रथम था। श्यामू के प्रथम आने पर उसे कई संस्थाओं द्वारा प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई और सरकारी कालेज में भी दाखिला मिल गया। श्यामू स्नातक की परीक्षा देने के बाद उसने प्रतियोगिता परीक्षा भी दिया और अच्छे अँको से पास हुआ।और अच्छे पद में नौकरी मिल गई।उधर रामू 12 वी के बाद कॉलेज की परीक्षा में फेल हो गया और अपने पिताजी के साथ कारोबार में हाथ बटाने लगा         
अब धानीराम को बहुत पछतावा हुआ कि मैंने सरकारी स्कूल का मजाक उड़ाया और उसे अहसास हुआ कि जो बच्चे मेहनत और लगन से पढ़ाई करेगा  वह किसी भी स्कूल में सफलता प्राप्त कर सकता है।और सरकारी स्कूल में भी पढ़ाई होती है।

प्रस्तुति- श्रीमती युगेश्वरी साहू
           शा. क. प्रा. शाला पवनी
           वि. ख.- बिलाईगढ़
           जिला- बालौदाबाजर(छ. ग.)

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