बालिका शिक्षा पर आधारित लघु कहानी
रानी की कहानी
अलीपुर नाम का एक गाँव था। वहां एक गरीब परिवार रहता था। परिवार के मुखिया का नाम दलीराम था। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों एक बेटा और एक बेटी के साथ रहता था। बेटी का नाम रानी और बेटा नाम राजू था। जब उनके दोनों बच्चे स्कूल जाने लायक हुए तब राजू को स्कूल में दाखिला करा दिया गया और बेटी रानी को दाखिला नही कराया गया। रानी भी पढ़ना चाहती थी। उसने अपने माता-पिता से बहुत विनती कि मैं भी स्कूल जाउंगी तब रानी के माता-पिता ने कहा- तुम पढ़कर क्या करोगी तुम्हें तो एक दिन चूल्हा फूंकना हैं। तुम घर के कामों में ध्यान दो, रानी चुप हो गयी। उस गाँव के स्कूल मास्टर ने भी बार-बार रानी के घर आकर उसका दाखिला कराने की विनती किये फिर भी रानी के माता-पिता ने रानी को स्कूल नही भेजा । वहां के शिक्षक लोग भी बार -बार अप्रवेशी बच्चे की जानकारी देते -देते परेशान थे।शिक्षक को अधिकारियों का दबाव भी पड़ रहा था कि उस बालिका को स्कूल में प्रवेश दिलाओ।एक दिन रानी के माता-पिता काम करने घर से बाहर गए थे तब रानी चुपके से स्कूल चली गयी और उनके आते तक घर वापस आ गयी। राजू ने अपने माता-पिता से शिकायत कर दिया कि रानी स्कूल गयी थी। तब रानी के पिता ने उसे बहुत डाँटा।
धीरे-धीरे समय बीतता गया। राजू कक्षा- 10वी के बाद पढ़ाई में रुचि नही लिया और वह जुआ खेलने शराब पीने तथा अय्याशियां करने लगा तथा माता-पिता के साथ मारपीट करता था उससे माता-पिता दुखी रहते थे। कुछ दिन बाद रानी विवाह के योग्य हुई। रानी बहुत सुंदर थी इसलिए एक साहूकार के बेटे ने रानी से विवाह कर लिया। विवाह के कुछ दिन बाद रानी के सास-ससुर का स्वर्गवास हो गया और तब हिसाब-किताब की सारी जवाबदारी रानी के पति पर आ गया। तब वह रानी को अपने काम मे मदद करने के लिए कहता था लेकिन रानी अनपढ़ थी। उसे हिसाब करना नहीं आता था तो उसका पति रोज उसे डाँटता था कि तुमने पढ़ाई क्यों नही की, तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें क्यों नही पढ़ाया-लिखाया।
कुछ दिन बाद रानी की एक बेटी हुई और रानी बहुत बीमार पड़ गयी। उसका पति काम-काज के लिये घर से बाहर जा रहा था तब जल्दबाजी में रानी के लिये दवाई लाया और घर के एक कोने में जहाँ चूहा मारने की दवाई थी वही पर दवाई को रखकर बाहर चला गया तब रानी दवाई के बदले में चूहा मारने की दवाई को पी ली क्योंकि उसे तो पढ़ना आता ही नही था और फिर रानी की मृत्यु हो गयी। मृत्यु का कारण पता चलने पर उसके माता-पिता को बहुत पछतावा हुआ कि हमनें रानी को अगर पढ़ाया होता तो वह आज जीवित रहती।
रानी के मृत्यु से उसके पति को बहुत दुःख हुआ और उसने अपने बेटी को अच्छे स्कूल में दाखिला कराया। और फिर उसकी बेटी पढ़-लिखकर एक अच्छी डॉक्टर बनी।
बालिका शिक्षा पर कविता
शिक्षा है जीवन का तीर कमान,
लड़का हो या लड़की शिक्षा मिले एक समान।
एक कलम बेटी को भी पकड़ा देना,
इनको भी स्कूल में दाखिला दिलवा देना।
बस तुम सही राह उनको दिखा देना,
शिक्षा का अधिकार देकर शीश उनका उठा देना।
लड़किया भी कम नही वो भी नाम रोशन करती है,
दूर गगन सागर को छू लेती पीछे नही हटती है।
परिवार का सम्मान माँ-बाप का अभिमान है,
ममता के आँचल में पली और उनका स्वाभिमान है।
सहन शक्ति होती है लड़को से अधिक उसमें,
ना जाने समाज की गलत नजर क्यो होती है जिसमें।
लाखो मन्नत के बाद एक बेटी होती हैं,
नही है बबूल का पेड़ तुलसी आँगन की होती है।
लड़कियां करती है दो आँगन को खुशहाल,
माता-पिता की शोभा होती है और ससुराल का श्रृंगार।
लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला जैसे बन सकती है बेटियां,
साहस और सम्मान दिला दो उनको देश का नाम रोशन कर सकती है बेटियां।
प्रस्तुति- श्रीमती युगेश्वरी साहू
शा. क. प्रा. शाला पवनी
वि. ख.- बिलाईगढ़
जिला- बालौदाबाजर(छ. ग.)
रानी की कहानी
अलीपुर नाम का एक गाँव था। वहां एक गरीब परिवार रहता था। परिवार के मुखिया का नाम दलीराम था। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों एक बेटा और एक बेटी के साथ रहता था। बेटी का नाम रानी और बेटा नाम राजू था। जब उनके दोनों बच्चे स्कूल जाने लायक हुए तब राजू को स्कूल में दाखिला करा दिया गया और बेटी रानी को दाखिला नही कराया गया। रानी भी पढ़ना चाहती थी। उसने अपने माता-पिता से बहुत विनती कि मैं भी स्कूल जाउंगी तब रानी के माता-पिता ने कहा- तुम पढ़कर क्या करोगी तुम्हें तो एक दिन चूल्हा फूंकना हैं। तुम घर के कामों में ध्यान दो, रानी चुप हो गयी। उस गाँव के स्कूल मास्टर ने भी बार-बार रानी के घर आकर उसका दाखिला कराने की विनती किये फिर भी रानी के माता-पिता ने रानी को स्कूल नही भेजा । वहां के शिक्षक लोग भी बार -बार अप्रवेशी बच्चे की जानकारी देते -देते परेशान थे।शिक्षक को अधिकारियों का दबाव भी पड़ रहा था कि उस बालिका को स्कूल में प्रवेश दिलाओ।एक दिन रानी के माता-पिता काम करने घर से बाहर गए थे तब रानी चुपके से स्कूल चली गयी और उनके आते तक घर वापस आ गयी। राजू ने अपने माता-पिता से शिकायत कर दिया कि रानी स्कूल गयी थी। तब रानी के पिता ने उसे बहुत डाँटा।
धीरे-धीरे समय बीतता गया। राजू कक्षा- 10वी के बाद पढ़ाई में रुचि नही लिया और वह जुआ खेलने शराब पीने तथा अय्याशियां करने लगा तथा माता-पिता के साथ मारपीट करता था उससे माता-पिता दुखी रहते थे। कुछ दिन बाद रानी विवाह के योग्य हुई। रानी बहुत सुंदर थी इसलिए एक साहूकार के बेटे ने रानी से विवाह कर लिया। विवाह के कुछ दिन बाद रानी के सास-ससुर का स्वर्गवास हो गया और तब हिसाब-किताब की सारी जवाबदारी रानी के पति पर आ गया। तब वह रानी को अपने काम मे मदद करने के लिए कहता था लेकिन रानी अनपढ़ थी। उसे हिसाब करना नहीं आता था तो उसका पति रोज उसे डाँटता था कि तुमने पढ़ाई क्यों नही की, तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें क्यों नही पढ़ाया-लिखाया।
कुछ दिन बाद रानी की एक बेटी हुई और रानी बहुत बीमार पड़ गयी। उसका पति काम-काज के लिये घर से बाहर जा रहा था तब जल्दबाजी में रानी के लिये दवाई लाया और घर के एक कोने में जहाँ चूहा मारने की दवाई थी वही पर दवाई को रखकर बाहर चला गया तब रानी दवाई के बदले में चूहा मारने की दवाई को पी ली क्योंकि उसे तो पढ़ना आता ही नही था और फिर रानी की मृत्यु हो गयी। मृत्यु का कारण पता चलने पर उसके माता-पिता को बहुत पछतावा हुआ कि हमनें रानी को अगर पढ़ाया होता तो वह आज जीवित रहती।
रानी के मृत्यु से उसके पति को बहुत दुःख हुआ और उसने अपने बेटी को अच्छे स्कूल में दाखिला कराया। और फिर उसकी बेटी पढ़-लिखकर एक अच्छी डॉक्टर बनी।
बालिका शिक्षा पर कविता
शिक्षा है जीवन का तीर कमान,
लड़का हो या लड़की शिक्षा मिले एक समान।
एक कलम बेटी को भी पकड़ा देना,
इनको भी स्कूल में दाखिला दिलवा देना।
बस तुम सही राह उनको दिखा देना,
शिक्षा का अधिकार देकर शीश उनका उठा देना।
लड़किया भी कम नही वो भी नाम रोशन करती है,
दूर गगन सागर को छू लेती पीछे नही हटती है।
परिवार का सम्मान माँ-बाप का अभिमान है,
ममता के आँचल में पली और उनका स्वाभिमान है।
सहन शक्ति होती है लड़को से अधिक उसमें,
ना जाने समाज की गलत नजर क्यो होती है जिसमें।
लाखो मन्नत के बाद एक बेटी होती हैं,
नही है बबूल का पेड़ तुलसी आँगन की होती है।
लड़कियां करती है दो आँगन को खुशहाल,
माता-पिता की शोभा होती है और ससुराल का श्रृंगार।
लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला जैसे बन सकती है बेटियां,
साहस और सम्मान दिला दो उनको देश का नाम रोशन कर सकती है बेटियां।
प्रस्तुति- श्रीमती युगेश्वरी साहू
शा. क. प्रा. शाला पवनी
वि. ख.- बिलाईगढ़
जिला- बालौदाबाजर(छ. ग.)


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