पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल : विद्यार्थियों ने बनाए 18 हजार सीड बॉल
कुरदा, जांजगीर-चांपा
पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कुरदा द्वारा एक प्रेरणादायक पहल की गई। विद्यालय की व्याख्याता श्रीमती रजिया अंजुम शेख के मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने मिलकर लगभग 18 हजार सीड बॉल (Seed Ball) तैयार किए। इस अभियान में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह, लगन और जिम्मेदारी के साथ भाग लिया तथा प्रकृति के प्रति अपने दायित्व का परिचय दिया।सीड बॉल मिट्टी, गोबर तथा विभिन्न स्थानीय वृक्षों के बीजों से तैयार किए गए हैं। वर्षा ऋतु के दौरान इन्हें विभिन्न स्थानों पर प्रक्षेपित किया जाएगा, जिससे बिना विशेष देखभाल के भी बीज अंकुरित होकर नए पौधों का रूप ले सकें। यह पहल न केवल हरित आवरण बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
अभियान के दौरान विद्यार्थियों को वृक्षों के महत्व, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के संबंध में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने स्वयं अपने हाथों से सीड बॉल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस गतिविधि ने उनमें प्रकृति के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
विद्यालय की व्याख्याता श्रीमती रजिया अंजुम शेख ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था का कार्य नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक कार्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विद्यालय परिवार ने इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया तथा भविष्य में भी वृक्षारोपण, सीड बॉल प्रक्षेपण और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
विद्यालय की यह अनूठी पहल समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई है। यदि इसी प्रकार प्रत्येक विद्यालय और प्रत्येक नागरिक प्रकृति के संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।


0 Comments