बोर्ड परीक्षा से पहले बच्चों के ऊपर परीक्षा के दबाव को कैसे कम किया जा सकता है??
परीक्षा का समय बच्चों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। यह समय केवल ज्ञान की जांच का नहीं, बल्कि मानसिक धैर्य, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन की भी परीक्षा होता है। अक्सर देखा जाता है कि परीक्षा नजदीक आते ही बच्चों में घबराहट, तनाव, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और आत्मविश्वास में गिरावट जैसी समस्याएँ बढ़ने लगती हैं। यह दबाव कई बार इतना अधिक हो जाता है कि बच्चे पढ़ाई से भी घबराने लगते हैं। ऐसे में माता-पिता, शिक्षक और समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों का मानसिक बोझ कम करने में सहयोग करें।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा मात्र है। बच्चों को यह समझाया जाना चाहिए कि अंक उनकी योग्यता का एकमात्र पैमाना नहीं हैं। जब बच्चों पर “अच्छे नंबर लाने” का अत्यधिक दबाव डाला जाता है, तो वे भय और चिंता में घिर जाते हैं। इसलिए बच्चों को प्रेरित करें, दबाव न डालें।
परीक्षा से पहले एक संतुलित दिनचर्या बनाना बहुत आवश्यक है। बच्चों को नियमित समय पर पढ़ने, खेलने, सोने और खाने की आदत डालनी चाहिए। पर्याप्त नींद (कम से कम 7-8 घंटे) बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। नींद पूरी न होने से याददाश्त और एकाग्रता दोनों प्रभावित होती हैं।
सकारात्मक वातावरण भी तनाव कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है। घर का माहौल शांत, सहयोगपूर्ण और उत्साहवर्धक होना चाहिए। बच्चों की तुलना अन्य बच्चों से न करें। हर बच्चा अलग होता है और उसकी सीखने की गति भी अलग होती है। तुलना से बच्चों में हीन भावना आती है, जो तनाव को और बढ़ा देती है।
बच्चों को छोटे-छोटे ब्रेक लेने के लिए प्रेरित करें। लगातार पढ़ाई करने से दिमाग थक जाता है। 40-50 मिनट पढ़ाई के बाद 10 मिनट का ब्रेक उन्हें तरोताजा करता है। इस दौरान वे हल्का टहल सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं या गहरी सांस लेने का अभ्यास कर सकते हैं। योग और प्राणायाम भी तनाव कम करने में बहुत सहायक हैं।
पोषण का भी परीक्षा के समय विशेष ध्यान रखना चाहिए। हल्का, पौष्टिक और संतुलित भोजन बच्चों को ऊर्जा देता है। जंक फूड से बचें और फल, हरी सब्जियां, दूध आदि को भोजन में शामिल करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात है बच्चों से संवाद। उनसे खुलकर बात करें, उनकी चिंताओं को सुनें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे अकेले नहीं हैं। यदि बच्चा किसी विषय को लेकर परेशान है, तो उसकी मदद करें या शिक्षक से संपर्क करें।
शिक्षकों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को परीक्षा को लेकर डराने के बजाय उन्हें सही मार्गदर्शन दें। अभ्यास प्रश्न, मॉडल पेपर और समय प्रबंधन के टिप्स बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
अंततः, बच्चों को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि प्रयास ही सबसे बड़ी सफलता है। जब बच्चे यह समझ जाते हैं कि उनसे केवल मेहनत की अपेक्षा है, परिणाम की नहीं, तब उनका दबाव स्वतः कम हो जाता है।
परीक्षा को उत्सव की तरह लें, डर की तरह नहीं। सकारात्मक सोच, सहयोगपूर्ण वातावरण और सही दिनचर्या के माध्यम से बच्चों के परीक्षा तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही स्वस्थ और खुशहाल शिक्षा का आधार है।
श्रीमती रजिया अंजुम शेख व्याख्याता
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कुरदा चांपा


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