शहीद दिवस
तीस जनवरी का दिन आया है,
भारत ने जब एक दीप गंवाया था।
सत्य की लौ थी जिसकी आँखों में,
अहिंसा का पथ जिसने दिखलाया था।
न तलवार उठी, न रण की हुंकार,
फिर भी जीती आज़ादी ,
जिस पर था सबका अधिकार।
प्रेम से जीता हर एक दिल,
बापू बने भारत का आधार।
गिरते हुए भी कह गए हमसे,
नफ़रत छोड़ो, थामो हाथ।
राम नाम संग ली अंतिम साँस,
दे गए मानवता का महान संदेश।
आज शहीद दिवस पर प्रण लें हम,
न चलें कभी हिंसा के संग।
सत्य, सेवा, प्रेम अपनाएँ,
तभी सच्चा भारत बनाएँ हम।


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