अध्याय 4 वायु
1 . निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-
(क) वायुमंडल क्या है ?
उत्तर :- हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की घनी चादर से घिरी हुई है जिसे वायुमंडल कहते हैं। पृथ्वी पर सभी जीव जीवित रहने के लिए वायुमंडल पर निर्भर हैं। यह हमें साँस लेने के लिए वायु प्रदान करता है एवं सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभाव से हमारी रक्षा करता है। यदि सुरक्षा की यह चादर न हो तो हम दिन के समय सूर्य की गर्मी से तप्त होकर जल सकते है एवं रात के समय ठंड से जम सकते हैं। अत : यह वह वायुराशि है जिसने पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाया है।
(ख) वायुमंडल का अधिकतर भाग किन दो गैसों से बना है ?
उत्तर :- वास्तव में वायुमंडल अनेक गैसों का मिश्रण है। लेकिन नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन ऐसी दो गैसे हैं, जिनसे वायुमंडल का बड़ा भाग बना है।
(ग) वायुमंडल में कौन – सी गैस हरित गृह प्रभाव पैदा करती है ?
उत्तर :- कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन।
(घ) मौसम किसे कहते है ?
उत्तर :- “ क्या आज वर्षा होगी ?” “ क्या आज दिन साफ़ होगा और धूप निकलगी ? “ कितनी ही बार हमने क्रिकेट प्रेमियों के मुँह से एकदिवसीय मैच के भविष्य पर अनुमान लगाते सुना होगा ? यदि हम कल्पना करें कि हमारा शरीर एक रेडियो है और मस्तिष्क उसके स्पीकर, तो मौसम वह है जो इसके नियंत्रण बटनों से छेड़छाड़ करता रहता है। मौसम, वायुमंडल की प्रत्येक घंटे तथा दिन – प्रतिदिन की स्थिति होती है। मौसम नाटकीय रूप से दिन – प्रतिदिन बदलता है। किंतु दीर्घ काल में या किसी स्थान का औसत मौसम, उस स्थान की जलवायु बताता है।
(ड़) वर्षा के तीन प्रकार लिखें।
उत्तर:- पृथ्वी पर जल के रूप में गिरने वाला वर्षण, वर्षा कहलाता है। क्रियाविधि आधार पर वर्षा के तीन प्रकार होते हैं : संवहनीय वर्षा, पर्वतीय वर्षा एवं चक्रवाती वर्षा। पौधों तथा जीव – जंतुओं के जीवित रहने के लिए वर्षा बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। इससे धरातल को ताजा जल प्रदान होता है। यदि वर्षा कम हो, तो जल की कमी तथा सूखा हो जाता है इसके विपरीत अगर वर्षा अधिक होती है तो बाढ़ आ जाती है।
(च) वायुदाब क्या है ?
उत्तर :- वायु हमारे शरीर पर उच्च दाब के साथ बल लगाती है। किंतु हम इसका अनुभव नहीं करते हैं। यह इसलिए होता है क्योंकि वायु का दाब हमारे ऊपर सभी दिशाओं से लगता है और हमारा शरीर विपरीत बल लगाता है। पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया गया दाब, वायु दाब कहलाता है। वायुमंडल में ऊपर की ओर जाने पर दाब तेजी से गिरने लगता है। समुद्र स्तर पर वायु दाब सर्वाधिक होता है और ऊँचाई पर जाने पर यह घटता जाता है। वायु दाब का क्षैतिज वितरण किसी स्थान पर उपस्थित वायु के ताप द्वारा प्रभावित होता है।
2 . सही (√) उत्तर चिह्नित कीजिए:-
(क) निम्नलिखित में से कौन – सी गैस हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है ?
(i) कार्बन डाइऑक्साइड (ii) नाइट्रोजन (iii) ओजोन
उत्तर :- (iii) ओजोन
(ख) वायुमंडल की सबसे महत्त्वपूर्ण परत है?
(i) क्षोभमंडल (ii) बाह्य वायुमंडल (iii) मध्यमंडल
उत्तर :- (i) क्षोभमंडल
(ग) वायुमंडल की निम्न परतों में कौन–सी बादल विहीन हैं ?
(i) क्षोभमंडल (ii) समताप मंडल (iii) मध्यमंडल
उत्तर:- (ii) समताप मंडल
(घ) वायुमंडल की परतों में जब हम ऊपर जाते हैं, तब वायुदाब
(i) बढ़ता है (ii) घटता है (iii) सामान रहता है
उत्तर:- (ii) घटता है
(ड़) जब दृष्टि तरल रूप में पृथ्वी पर आती है, उसे हम कहते है
(i) बादल (ii) वर्षा (iii) हिम
उत्तर :- (ii) वर्षा
3. निम्नलिखित स्तम्भों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए:-
(क) व्यापारिक पवने (i) सूर्य से आने वाली ऊर्जा
(ख) लू (ii) मौसमी पवन
(ग) मानसून (iii ) पवन की क्षैतिज गति
(घ) पवन (iv) ओजोन गैस की परत
(v) स्थायी पवन
(vi) स्थानीय पवन
उत्तर:-
(क) व्यापारिक पवने (vi) स्थायी पवन
(ख) लू (v) स्थानीय पवन
(ग) मानसून (ii) मौसमी पवन
(घ) पवन (iii) पवन की क्षैतिज गति
4. कारण बताइए
उत्तर:-
(क) व्यापारिक पवने (vi) स्थायी पवन
(ख) लू (v) स्थानीय पवन
(ग) मानसून (ii) मौसमी पवन
(घ) पवन (iii) पवन की क्षैतिज गति
4. कारण बताइए :-
(क) आद्र दिन में गीले कपड़े सूखने में अधिक समय लेते हैं।
उत्तर :- जब जल पृथ्वी एवं विभिन्न जलाशयों से वाष्पित होता है तो यह जलवाष्प बन जाता है। वायु में किसी भी समय जलवाष्प की मात्रा को ‘आर्द्रता’ कहते हैं। जब वायु में जलवाष्प की मात्रा अत्यधिक होती है, तो उसे हम आद्र दिन कहते हैं। जैसे – जैसे वायु गर्म होती जाती है, इसकी जलवाष्प धारण करने की क्षमता बढ़ती जाती है और इस प्रकार यह और अधिक आद्र हो जाती है। आद्र दिन में, कपड़े सूखने में काफी समय लगता है एवं हमारे शरीर से पसीना आसानी से नहीं सूखता और हम असहज महसूस करते हैं।
(ख) भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर आतपन की मात्रा घटती जाती है।
उत्तर :- भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणे सीधी पड़ती है। ध्रुवों को आयु उत्तरात्मक सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है। इसलिए भूमध्य रेखा से पूर्व की ओर जाने पर आतपन की मात्रा घटती जाती है।

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