अध्याय 8 छत्तीसगढ़ अध्ययन
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1. केवल नाम लिखिए-
(अ) सबसे अधिक वर्षों तक शासन करने वाला राजवंश-
उत्तर-कल्चुरिवंश, हैहयवंशी।
(ब) सोनाखान के जमींदार-
उत्तर-वीरनायरायण सिंह।
(स)सबसे प्राचीन नाट्यशाला छत्तीसगढ़ में कहाँ है ?
उत्तर-सरगुजा जिला।
(द) रायपुर फौजी छावनी में किसके नेतृत्व में क्रांति हुइ?
उत्तर-हनुमान सिंह राजपूत।
(इ) किस पुलिस अधिकारी ने वर्दी त्यागकर राष्ट्रीयआन्दोलन में समर्पित भाव से कार्य किया?
उत्तर-पं. लखन लाल मिश्र।
प्रश्न 2. सही संबंध जोडिए-
1. भोंसला शासक (क) हनुमान सिंह
2. क्रांतिकारी नेता (ख) बिम्बा जी
3. साहित्यकार (ग) गुरु घासीदास
4. समाज सुधारक (घ) प.गोपाल मिश्र
उत्तर-1. (ख) 2. (क) 3. (घ) 4. (ग)
प्रश्न 3. प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(अ) इस क्षेत्र को छत्तीसगढ़ क्यों कहते हैं ?
उत्तर-'इस क्षेत्र में प्राचीन काल में कल्चुरि राजाओं का शासन था। उस समय राज्य-रतनपुर राज्य और रायपुर राज्य के रूप में बँटा हुआ था। दोनों ही राज्यों में क्रमशः 18-18 गढ़ (किले) थे। इसलिए इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।
(ब) छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विकास किस तरह हुआ?
उत्तर–आरंभ से ही छत्तीसगढ़ राज्य शांति प्रिय रहा है। इस क्षेत्र में ज्यादा राजनीतिक बदलाव देखने को नहीं मिलता। हमारे राज्य में लगभग दसवीं शताब्दी के अंत से अट्ठारहवीं शताब्दी के मध्य तक कल्चुरि वंश का शासन था। बाद में सन् 1741 से मराठा शासकों का प्रभाव भी छत्तीसगढ़ पर बढ़ा। उसके बाद अंग्रेजी प्रशासन सन् 1854 से 1947 तक रहा। तब यहाँ 14 सामंती राज्य और अनेक जमींदारियाँ भी थीं। आजादी की लड़ाई में हमारे राज्य के क्रांतिवीरों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 15 अगस्त, सन् 1947 की सुबह दिल्ली के लाल किले पर स्वतंत्र भारत का झण्डा फहराया गया उसी के साथ छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी तत्कालीन खाद्यमंत्री आर. के. पाटिल ने तिरंगा फहराया। इस प्रकार छत्तीसगढ़ भी नये छत्तीसगढ़ के निर्माण की ओर आगे बढ़ा।
परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. छत्तीसगढ़ का प्रयाग किसे कहा जाता है ?
उत्तर-राजिम।
प्रश्न 2. आदिमानव सभ्यता के प्रारंभिक प्रमाण किस जिले में मिलते हैं?
उत्तर-रायगढ़।
प्रश्न 3. मेघदूत की रचना किसने की थी ?
उत्तर-महाकवि कालिदास।
प्रश्न 4. छत्तीसगढ़ में उपलब्ध आदिमानव सभ्यता के
प्रमाणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-छत्तीसगढ़ में आदिमानव के प्रारंभिक प्रमाण हमें
रायगढ़ के पास सिंघनपुर, काबरा पहाड़, दुर्ग क्षेत्र का चित्तवा डोंगरी में मिले शैलचित्र, बालोद धमतरी मार्ग पर सोरर, मुज गहन, करकाभाट के अतिरिक्त बसना सराईपाली के पास बरलिया गाँव में मिले शव स्थल, पाषाण स्तंभ के रूप में मिलते हैं। पाण्डुका गाँव के पास सिरकट्टी में नदी बन्दरगाह के अवशेष है।नदी जलमार्ग द्वारा महानदी से संबलपुर (हीराकुण्ड) तक नावों द्वारा व्यापार किया जाता था।
प्रश्न 5. छत्तीसगढ़ के धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों
का वर्णन कीजिए।
उत्तर-छत्तीसगढ़ राज्य धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक सम्पन्न रहा है। यहाँ महाभारत, रामायण व बौद्धकालीन घटनाओं से जुड़े अनेक स्थल हैं । ऐतिहासिक दृष्टि से मल्हार में प्राचीन मूर्तियों व पुरावशेष, तालागाँव का प्रसिद्ध रूद्रशिव प्रतिमा, सिरपुर में ईंट से बना-लक्ष्मण मंदिर, राजिम का राजीवलोचन मंदिर, रतनपुर, रायपुर व अम्बिकापुर का महामाया मंदिर, दन्तेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर, भोरम देव का शिव मंदिर, बारासूर का गणेश मन्दिर प्रसिद्ध है। मल्हार, सिरपुर, आरंग, राजिम, रतनपुर में जैन धर्म व बौद्ध धर्म से संबंधित प्राचीन अवशेष मिले हैं। पाली, जांजगीर, खरौद, नगरी सिहावा, बस्तर, डोंगरगढ़, खैरागढ़, सारंगढ़, पत्तरोही,शिवरीनारायण, लवन, गंडई, चम्पारन, रायपुर, दुर्ग, धमतरी आदि भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं।
प्रश्न 6. छत्तीसगढ़ में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर- छत्तीसगढ़ की जनता पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ओजस्वी भाषण और दबंग व्यक्तित्व का गहरा प्रभाव पड़ा। जिस तरह नेताजी ने अंग्रेजों की नौकरी को लात मारकर भारत माता को बंधन मुक्त कराने में अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य में भी उनसे प्रेरित होकर कई देश भक्तों ने सरकारी नौकरी को ठोकर मारकर राष्ट्रीय आन्दोलन के आजीवन अंग बने रहे। इनमें बैरिस्टर छेदीलाल तथा बाजा मास्टर त्रिपुरी कांग्रेस के काफी सक्रिय सदस्य थे। रायपुर व दुर्ग के कलेक्टर रहे श्री रामकृष्ण पाटिल ने सरकारी नौकरी छोड़कर राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लिया। दुर्ग के पुलिस अधिकारी पं. लखनलाल मिश्र ने सरकारी वर्दी त्याग कर खादी पहन राष्ट्रीय आन्दोलन में सदा के लिए कूद पड़े।

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