1. माचिस की तिली से दुर्गा माता की आकृति
१.उद्देश्य -बच्चों को कबाड़ से जुगाड़ के अंतर्गत माचिस की तीलियों की सहायता से दुर्गा माता की कलाकृति का निर्माण करना बताया गया।
२.सामग्री-माचिस की तीली , पुट्ठा, फेवीकॉल, पालीथीन
३.गतिविधि - बच्चों को दुर्गा माता के अलग-अलग आकृतियों को पेंसिल के माध्यम से बनाया गया, और उसके बाद उसमें माचिस की पड़ी तीलियों को चिपका कर उन्हें नया रूप प्रदान किया गया।
४.लाभ-बच्चों में नये कलाकृतियों का निर्माण का विकास होता है। साथ ही साथ सृजन शक्ति का विकास होता है। उनमें नए-नए चीजों को जानने की उत्सुकता पैदा होती है। संज्ञानात्मक के साथ-साथ सहसंज्ञानात्मक गतिविधियों को बच्चे जान पाते हैं।
2. साबू दाने की सहायता से आकृति निर्णय
१.उद्देश्य -बच्चों को कबाड़ से जुगाड़ के अंतर्गत बच्चों को घर में रखे हुए साबूदाने के माध्यम से अलग-अलग आकृतियों का निर्माण कराना।
२.सामग्री-साड़ी का डब्बा, साबूदाने,लाल पेपर फेविकोल
३.गतिविधि - बच्चों को साबूदाने के माध्यम से अलग-अलग आकृतियों का निर्माण कराना सिखाया गया।
४.लाभ-बच्चों में इस गतिविधि के माध्यम से सृजनशीलता का विकास होता है। बच्चों को शाला आने में रुचि विकसित होती है। कबाड़ से जुगाड़ के अंतर्गत बच्चे घर में रखे हुए सामानों के द्वारा नए-नए सजावटी एवं ज्ञानवर्धक वस्तुओं का निर्माण कर पाते हैं।
श्रीमती विभा सोनी शिक्षिका शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला जांजी विकासखंड- मस्तूरी जिला- बिलासपुर छत्तीसगढ़

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