इतिहास कक्षा सातवीं अध्याय 8 मुगलकालीन जनजीवन

सामाजिक विज्ञान इतिहास 

कक्षा सातवीं 

अध्याय 8 मुगलकालीन जनजीवन



अभ्यास के प्रश्न

 प्रश्न 1. खाली स्थान भरो–

( 1 ) मुगलकाल में शासन का सर्वोच्च बादशाह होता था।

( 2 ) मुगलकाल में छत्तीसगढ़ में कल्चुरी वंश का शासन था।

( 3 )  कृषि मुगलकाल के लोगों का मुख्य व्यवसाय था।

( 4 ) दिल्ली के लाल किला का निर्माण शाहजहां ने कराया था।

प्रश्न 2. प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

( 1 ) सत्रहवीं शताब्दी में किस उद्योग का विशेष विका हुआ ?

उत्तर- सत्रहवीं शताब्दी में कपड़ा उद्योग का विशेष विका हुआ।

( 2 ) बहते पानी का उपयोग करना किस काल की विशेष थी ? 

उत्तर- बहते पानी का उपयोग करना जहाँगीर के काल विशेषता थी ।

( 3 ) बादशाह अकबर की राजधानी कहाँ थी ? 

उत्तर- बादशाह अकबर की राजधानी दिल्ली थी ।

( 4 ) सफेद संगमरमर का प्रयोग किसके शासन काल में किया गया था ?


उत्तर- सफेद संगमरमर का प्रयोग शाहजहाँ के शासन काल में किया गया था ।

( 5 ) मुगल सम्राट व्यक्तिगत विचार - विमर्श किस स्थान पर करते थे ?

उत्तर- मुगल सम्राट व्यक्तिगत विचार विमर्श ' दीवाने - ए ' खास ' में किया करते थे । 

( 6 ) प्रसिद्ध शालीमार बाग कहाँ है ?

उत्तर- प्रसिद्ध शालीमार बाग लाहौर में स्थित है ।

( 7 ) मुगलकालीन समाज कितने वर्गों में बँटा था ?

 उत्तर मुगलकालीन समाज चार वर्गों में बँटा था-

( 1 ) बादशाह और उनका शाही परिवार- बादशाह शासन का सर्वोच्च होता था । 

( 2 ) अमीर - दरबार में ऊँचे पदों पर आसीन लोग - मंत्री , सेनापति , प्रांतपति आदि ।

( 3 ) मध्यवर्ग - छोटे अधिकारी , सैनिक , व्यापारी आदि ।

( 4 ) निम्नवर्ग – किसान , कारीगर , दलित वर्ग , सेवक आदि । ( 8 ) मुगलकालीन वेशभूषा कैसी थी ?

उत्तर- हिन्दू और मुसलमान पुरुषों की पोशाकें आमतौर पर एक जैसी होती थीं शहर एवं गाँवों के पहनावे में अंतर था । धोती , पायजामा , कुरता , सलवार , साड़ी प्रमुख रूप से भारतीय परिधान थे मुसलमान सिर पर टोपी पहनते थे । 

( 9 ) मुगलकाल में लोग कौन - कौन - सा व्यवसाय करते थे ?

उत्तर- इस समय खेती के अतिरिक्त अन्य व्यवसाय भी जड़ें जमा चुके थे । सत्रहवीं शताब्दी में कपड़ा उद्योग का विशेष विकास हुआ । ढाका की मलमल , बनारस की जरी का काम , बंगाल , बिहार व गुजरात के सूती वस्त्र , कश्मीर के ऊनी कपड़े विश्व प्रसिद्ध थे । विदेशी व्यापारी भारत से सूती कपड़े , नील , अफीम , तथा काली मिर्च ले जाते थे । 

( 10 ) मुगलकाल में कौन - कौन से त्यौहार बनाए जाते थे ?

 उत्तर- उस समय के प्रमुख त्यौहार थे - दशहरा , दीपावली , होली , इंद , नौरोज , मुहर्रम आदि । 

( 11 ) मुगलकाल में छत्तीसगढ़ में सामाजिक एवं धार्मिक स्थिति का वर्णन कीजिए । 

उत्तर - मुगलकाल में ही छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ का आगमन हुआ । छत्तीसगढ़ के गाँव - गाँव में कबीर पंथ का प्रचार हुआ । जिससे यहाँ का जनजीवन प्रभावित हुआ । रायपुर - बिलासपुर मार्ग. पर रायपुर से 55 किमी . दूर स्थित दामाखेड़ा कबीर पंथियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है । इस समय कल्चुरियों के शासन काल में छत्तीसगढ़ में देवीपूजा ( शक्ति ) प्रारंभ हुई जो पूरे राज्य में फैल गई । ब्राम्हणों का इसमें विशेष योगदान था । वे राजगुरु , ज्योतिषी तांत्रिक एवं पुरोहित थे । महामाया ( शक्ति ) के अतिरिक्त बम्लेश्वरी देवी ( डोंगरगढ़ ) और दंतेश्वरी ( दंतेवाड़ा ) शक्ति पूजा एवं राजीव न लोचन ( राजिम ) दुग्धाधारी मंदिर ( रायपुर ) श्रद्धा केन्द्र के रूप में स्थापित हुए । गाँवों में माता देवाला का विशिष्ट महत्व रहा है । यहाँ सामाजिक भेदभाव नहीं था , सभी को समाज में उचित स्थान न न प्राप्त था । 

( 12 ) मुगलकालीन स्थापत्य कला की विशेषताएँ लिखिए।



 उत्तर- मुगलकाल में स्थापत्य ( वास्तु ) कला में अद्वितीय प्रगति हुई । इसकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं–

( 1 ) मुगल कालीन वास्तुकला में पारम्परिक भारतीय कला तथा ईरानी व मध्य एशियाई कला का सुन्दर मिश्रण दिखाई देता है ।

( 2 ) इमारतों का अनुपात , भव्यता तथा सुन्दरता और इमारतों के चारों ओर उद्यान इस कला की विशेषता है । 

( 3 ) ऊँचे चबूतरे पर बनी इमारतों के निर्माण में लाल व सफेद संगमरमर के पत्थर , फूल - पत्तों की नक्काशी , इमारतों के पत्थरों में नक्काशीदार जाली , दुहरे गुबंद , अर्द्ध गुम्बद आदि मुगलकालीन इमारतों की विशेषता है । 

( 4 ) इस युग की महत्वपूर्ण स्थापत्य कला है- बुलंद दरवाजा , दीवाने - ए - खास , ताजमहल , मयूर सिंहासन , जामा मस्जिद , लाल किला आदि । 

 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 प्रश्न 1. मुगलकालीन धार्मिक स्थिति का वर्णन कीजिए ।

 उत्तर- मुगल सम्राट इस्लाम धर्म के अनुयायी थे । किन्तु वे सभी धर्मों का आदर करते थे बादशाह अकबर और जहाँगीर ने दूसरे धर्म को जानने , समझने तथा उनकी अच्छी बातों को सीखने का प्रयास किया । इसके लिए उन्होंने हिन्दू , साधू , पारसी , व जैन मुनि , ईसाई पादरी तथा मुस्लिम मौवलियों को अपने दरबार में आमंत्रित किया । उसने स्वयं बातचीत की बल्कि उनकी आपस में बातचीत भी कराई , जिससे कि वे एक दूसरे के धर्मों को जाने । उसने अलग - अलग धर्मों के ग्रंथों का विभिन्न भाषाओं में फारसी आदि में अनुवाद करवाया । ताकि सभी लोग सभी धर्मों की अच्छी बातों को समझ सके । यही प्रवृत्ति समाज के आम लोगों में भी फैली और वे भी एक दूसरे के धर्म को जानने समझने लगे । इसी काल में तुलसीदास , कबीरदास , सृहदास , मीराबाई और गुरुनानक एवं छत्तीसगढ़ में गोपाल मिश्र जैसे भक्त कवि हुए । जिन्होंने सभी धर्मों का आदर करना सिखाया ।

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