सामाजिक विज्ञान
कक्षा आठवीं
अध्याय 7 भारतीय गणतंत्र की स्थापना
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1. खाली स्थान भरिए-
1. सत्ता हस्तांतरण सम्बन्धी तीन ब्रिटिश मंत्रियों की समिति को कैबिनेट मिशन कहते हैं ।
2. केन्द्र में अंतरिम सरकार का गठन पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में हुआ था ।
3. संविधान सभा ( संविधान निर्मात्री समिति ) के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे ।
4. संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे ।
5. भारत की स्वतंत्रता के समय इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री एटली थे ।
6. ब्रिटिश भारत का अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन थे।
7. स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन थे।
8. स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे ।
9. सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है ।
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प्रश्न 2. सही संबंध जोड़िए
1. सीधी कार्यवाही दिवस -( ख )16 अगस्त 1946
2. स्वतंत्रता दिवस -( घ ) 15 अगस्त 1947
3. संविधान के प्रारूप को अंतिम रूप -( क ) 26 नवम्बर 1949
4. गणतंत्र दिवस -( ग ) 26 जनवरी 1950
प्रश्न 3. तिथियों के योजनाओं को उचित क्रम में लिखिए
माउंट बेटन योजना , केबिनेट मिशन योजना , भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ।
उत्तर- ( 1 ) केबिनेट मिशन योजना , ( 2 ) माउंट बेटन योजना , ( 3 ) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ।
प्रश्न 4. प्रश्नों के उत्तर दीजिये
( 1 ) केबिनेट मिशन क्या है?
उत्तर- सन् 1946 में इंग्लैण्ड के तत्कालीन प्रधानमंत्री एटली ने भारत को स्वतंत्र करने का विचार किया । वह चाहता था कि भारत शीघ्र आजाद हो और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने एक तीन सदस्यीय समिति को भारतीय नेताओं से बातचीत कर उपस्थित समस्याओं को दूर करने के सुझाव देने का दायित्व सौंपा । इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि संविधान सभा में प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा चुने गए व्यक्ति और भारतीय रियासतों के राजाओं द्वारा मनोनीत व्यक्ति शामिल होंगे । इसे केबिनेट मिशन कहते हैं ।
( 2 ) अंतरिम सरकार की स्थापना कैसे हुई ?
उत्तर - गवर्नर जनरल वेवेल के आमंत्रण पर केन्द्र पर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी कांग्रेस के नेता पं . जवाहर लाल नेहरू ने सरकार का गठन किया । अंतरिम सरकार में पहले तो मुस्लिम लीग शामिल नहीं हुई थी और जब शामिल हुई तो उसने सरकार के कार्यों में बाधा उत्पन्न करना शुरू कर दिया । इसके अलावा डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान सभा का गठन हुआ , जिसने दिसम्बर , सन् 1946 से अपना काम शुरू कर दिया लेकिन मुस्लिम लीग तथा राजाओं ने उसमें भाग नहीं लिया ।
( 3 ) माउंट बेटन योजना क्या है ?
उत्तर - लार्ड माउंट बेटन मार्च सन् 1947 को वायसराय बनकर भारत आए । वे देश की स्वतंत्रता की योजना को अंतिम रूप देने आये थे । उस समय भारत धार्मिक ( साम्प्रदायिक ) अराजकता की दौर से गुजर रहा था । लार्ड माउंट बेटन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के शीर्ष नेताओं से लम्बी बात - चीत की लेकिन समझौता का आसार नजर नहीं आया तो अंत में उसने भारत विभाजन की सिफारिश कर दी । इस योजना को माउंट बेटन योजना के नाम से जाना जाता है ।
( 4 ) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम क्या है ?
उत्तर- लार्ड माउंट बेटन की सिफारिश पर इंग्लैण्ड की संसद द्वारा 18 जुलाई , सन् 1947 को एक प्रस्ताव पारित किया गया । इस अधिनियम को ही भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम कहा जाता है । इस अधिनियम की मुख्य बातें निम्न हैं–
( 1 ) भारत तथा पाकिस्तान के रूप में दो स्वतंत्र राज्यों का निर्माण ।
( 2 ) दोनों को अपना संविधान निर्माण की स्वतंत्रता ।
( 3 ) दोनों देश चाहे तो राष्ट्र मण्डल के सदस्य रहे ।
( 4 ) भारत सचिव पद की समाप्ति ।
( 5 ) ब्रिटिश शासन का अंत ।
( 6 ) नये संविधान बनने तक 1935 अधिनियम लागू ।
( 7 ) दोनों देशों से इंग्लैण्ड की सभी पुरानी संधि समाप्त ।
( 8 ) दोनों को गवर्नर जनरल चुनने की स्वतंत्रता ।
( 5 ) देशी रियासतों का विलय क्यों किया गया ?
उत्तर – भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार भारत को आजादी मिली , साथ ही भारत का विभाजन भारत और पाकिस्तान नामक दो राज्यों में हो गया । उस समय देश में लगभग 150 से ज्यादा स्वतंत्र रियासतें थीं । उनके विषय में यह प्रावधान किया गया था कि वे चाहें तो दोनों में से किसी भी राज्य में शामिल हो सकते हैं भारतीय राजनेता देश के विभाजन का दंश तो खेल चुके थे और अब वे भारत को छोटे - छोटे टुकड़ों में बँटता नहीं देख सकते थे । यदि ये रियासतें स्वतंत्र राज्य बन जाती तो इससे भारतीय सुरक्षा को खतरा भी उत्पन्न हो जाता । अतः भारत की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए देशी रियासतों का विलय आवश्यक था । भारत में रियासतों के विलय की जिम्मेदारी दबंग नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल के मजबूत कंधे पर सौंपी गई ।
( 6 ) भारतीय गणतंत्र की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई ?
उत्तर - समस्याएँ -
1. शरणार्थियों की समस्या पाकिस्तान से हिन्दुओं तथा अन्य जातियों को भगाया गया । ये सब भारत आये । इन्हें बसाना बड़ी समस्या थी ।
2. रोजगार की समस्या - पाकिस्तान से आये लोगों के पास रोजी - रोटी का कोई साधन नहीं था । भारत के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई ।
3. आर्थिक समस्या - भारत - पाक बँटवारे के कारण कई उद्योग पाकिस्तान में चले गये , कई कारखाने बन्द हो गये । मजदूर बेकार हो गये । भारत की अर्थव्यवस्था लड़र गई ।
4. भोजन की समस्या - विभाजन के बाद गेहूँ और चावल उत्पन्न करने वाला एक विस्तृत क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया । इससे अन्न संकट उत्पन्न हो गया ।
5. परिवहन व्यवस्था की समस्या- देश विभाजन के कारण परिवहन व्यवस्था अस्त - व्यस्त हो गई ।
6. कश्मीर समस्या- पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया । कश्मीरी भारत में मिलना चाहते थे । कश्मीर में सेना भेजी गई और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया ।
7. देशी राज्यों की समस्या- भारत की स्वतंत्रता के साथ 500 से भी अधिक देशी रियासतें भी स्वतन्त्र हो गईं । इन रियासतों को भारत संघ में शामिल किये बिना भारत की स्वतन्त्रता अधूरी थी ।
प्रश्न 5. टिप्पणी लिखिए
( क ) लीग की सीधी कार्यवाही
( ख ) भारत विभाजन
( ग ) भारतीय संविधान का निर्माण ।
उत्तर– ( क ) लीग की सीधी कार्यवाही- मुस्लिम लीग अलग राज्य के रूप में पाकिस्तान चाहती थी और कांग्रेस भारत का विभाजन हर हाल में रोकना चाहती थी । 19 अगस्त , सन् 1946 को मुस्लिम लीग की यह अलगाववादी भावना परवान चढ़ गई और उसने ' सीधी कार्यवाही दिवस ' की घोषणा कर दी । इस घोषणा के बाद पूरे देश में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठे । बंगाल , बिहार , मुम्बई और कई राज्यों में हिन्दू - मुसलमान आपस में मरने - मारने लगे । पूरे देश में साम्प्रदायिकता का तांडव होने लगा । हजारों निर्दोष लोग अकारण मारे गए लेकिन न ही मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया और न ही सरकार द्वारा इसे रोकने का प्रयास किया गया । यह दंगा महीनों चलता रहा जिसमें लाखों की जानें गई और अरबों की सम्पत्ति जल कर खाक हो गई ।
( ख ) भारत - विभाजन- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रारंभ से ही भारत विभाजन के पक्ष में नहीं थी । पर मोहम्मद अली जिन्ना की कट्टरता और देश में भड़कती हिंसा और अपार धन- जन की हानि ने उन्हें भारत विभाजन को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया । महात्मा गाँधी ने विवश होकर कहा कि “ शरीर के किसी अंग में यदि असाध्य रोग हो जाय तो उस अंग को काटकर फेंक देना चाहिए । " स्पष्ट था कि कांग्रेस ने लाचारी की स्थिति में भारत विभाजन को स्वीकार किया और अखण्ड भारत , पाकिस्तान और भारत के रूप में दो खण्ड हो गया । पश्चिम पंजाब , पूर्वी बंगाल , सिंध और पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत को मिलाकर पाकिस्तान बना । शेष भारत , भारतदेश बना ।
( ग ) भारतीय संविधान का निर्माण- डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में भारतीय संविधान के निर्माण के लिए एक समिति गठित की गई , जिसका नाम संविधान सभा था । इस सभा में संविधान प्रारूप समिति गठित की गई , जिसके अध्यक्ष डॉ . भीमराव अम्बेडकर थे । इस समिति ने दिसम्बर , सन् 1946 में अपना कार्य आरम्भ किया और नये संविधान का प्रारूप 26 नवम्बर सन् 1949 को बनकर तैयार हो गया । लेकिन इसे 26 जनवरी सन् 1950 को पूरे देश में लागू किया गया । इस प्रकार हमारा देश सम्पूर्ण प्रभुत्व गणराज्य बन गया । इस दिन की याद में हम प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व ( गणतंत्र दिवस ) के रूप में मनाते हैं ।
परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. मंत्रिमंडल की कार्यवाही में बाधा पड़ने से क्या असर पड़ता है ?
उत्तर- मंत्रिमण्डल की कार्यवाही से ही राष्ट्र - विकास की नीतियाँ बनती हैं । सभी महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय कार्यवाही के द्वारा ही सम्पन्न होता है । यदि मंत्रिमण्डल की कार्यवाही में अनावश्यक गतिरोध उत्पन्न किया जाता है तो कई राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर निर्णय लेने में देरी होती है । विकास की योजनाओं को भी उचित समय पर लागू नहीं किया जा सकता । इससे राष्ट्र का विकास प्रभावित होता है और राष्ट्रीय एकता को भी क्षति होती है । जनता में सरकार और विपक्ष की छवि धूमिल हो जाती है ।
प्रश्न 2. भारत में लौहपुरुष किसे तथा क्यों कहा जाता है ? उत्तर- भारत में ' लौह पुरुष ' ओजस्वी नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल को कहा जाता है । देश की आजादी के समय लगभग 550 से भी अधिक स्वतंत्र रियासतें देश में थीं । यदि उनका विलय भारत में नहीं किया जाता तो देश की एकता व सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी इन रियासतों के विलय की जिम्मेदारी सरदार पटेल को सौंपी गई थी । उन्होंने इस दायित्व को बड़ी बुद्धिमता से निभाया । अपनी सूझबूझ के कारण अधिकांश रियासतों को उसने भारत में मिला लिया । इस असाधारण कार्य को सफलतापूर्वक करने के कारण ही सरदार पटेल को लौह पुरुष के सम्मान से सम्मानित किया गया।
प्रश्न 3. टिप्पणी लिखिए-
( 1 ) जूनागढ़ समस्या , ( 2 ) कश्मीर समस्या ( 3 हैदराबाद ) विलय ।
उत्तर- ( 1 ) जूनागढ़ समस्या- जूनागढ़ सौराष्ट्र का एक छोटा सा रियासत था । वहाँ का नवाब पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था लेकिन वहाँ की जनता भारत में शामिल होना चाहती थी । अतः सत्ता और जनता के बीच संघर्ष छिड़ गया और नवाब जूनागढ़ छोड़कर पाकिस्तान भाग गया । इस प्रकार फरवरी , सन् 1948 को जूनागढ़ भारत का अभिन्न अंग बन गया ।
( 2 ) कश्मीर समस्या - उस समय कश्मीर रियासत पर राजा हरिसिंह का शासन था । वे चाहते थे कि उनकी रियासत एक स्वतंत्र राज्य बने , वे किसी भी राज्य में शामिल होने को तैयार न थे , किन्तु वहाँ की जनता भारत विलय की माँग कर रही थी रियासत की स्वतंत्रता के लिए पाकिस्तान के सशस्त्र घुसपैठियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया । भारत ने इस संघर्ष में राजा हरिसिंह का पूरा सहयोग दिया और घुसपैठिए खदेड़ दिए गए । तब राजा हरिसिंह ने स्वेच्छा से कश्मीर रियासत का भारत में शामिल करना स्वीकार किया और संधि पत्र पर हस्ताक्षर किया । तब से कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है । किन्तु यह दुर्भाग्य पूर्ण बात है कि आजादी के इतने साल बाद भी पाकिस्तान कश्मीर पर आतंकवादी घटनाओं को अन्जाम देने में रूप से मदद करता आ रहा है ।
( 3 ) हैदराबाद का विलय - तत्कालीन हैदराबाद रियासत में मुसलमान शासक था । वह पाकिस्तान के बहकावे में आकर अपना राज्य पाकिस्तान में मिलाना चाहता था । किन्तु वहाँ जनता स्वामी रामतीर्थ के नेतृत्व में हैदराबाद का भारतीय गणरा में विलय की माँग कर रही थी , इन माँगों को दबाने के लिए निजाम द्वारा जनता पर अनेक अमानवीय अत्याचार किया गया । अंतत : भारतीय सैनिकों द्वारा निजाम के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई और हैदराबाद रियासत भी भारत में विलीन हो गई ।
प्रश्न 4. भारत के विभाजन के कारणों का उल्लेख कीजिए । उत्तर भारत के विभाजन के निम्नलिखित कारण थे
( 1 ) अंग्रेजी सरकार की फूट डालो और राज्य करो नीति – प्रारम्भ में अंग्रेजी सरकार ने मुसलमानों की मांगों को कुचलने का प्रयास किया था , किन्तु जब 1885 ई . में कांग्रेस को स्थापना हुई तब अंग्रेजी सरकार की चिन्ता बढ़ गई । अब वह मुसलमानों को प्रसन्न करने का प्रयास करने लगी । उसी के उकसाने पर 1906 ई . में मुस्लिम लीग ' की स्थापना हुई । 1909 ई . के मार्ले - मिण्टो एक्ट द्वारा मुसलमानों को पृथक् प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया । इस प्रकार सरकार की फूट डालो और शासन करो की नीति भी पाकिस्तान के निर्माण में सहायक सिद्ध हुई ।
( 2 ) मुहम्मद अली जिन्ना की हठधर्मिता- जिन्ना द्वारा पाकिस्तान बनाने की रट तथा हठधर्मिता के कारण पाकिस्तान का निर्माण संभव हुआ । द्विराष्ट्र सिद्धान्त जिन्ना की ही देन थी । उन्होंने अपनी तार्किक योग्यता के द्वारा द्विराष्ट्र के सिद्धान्त और भारत के विभाजन की माँग को प्रतिपादित किया ।
( 3 ) मुस्लिम लीग की दो राष्ट्रों की नीति - मुस्लिम लीग लोग प्रारम्भ से ही यह प्रचार कर रही थी कि इस देश में हिन्दू और मुसलमान हैं । इसी आधार पर मुसलमानों के लिए पृथकू देश की माँग करती रही । सन् 1940 में उसने पाकिस्तान की माँग कर दी थी । अंग्रेजों का भी इसमें सहयोग रहा ।
( 4 ) हिन्दू - मुस्लिम साम्प्रदायिक दंगे- 16 अगस्त , सन् 1946 ई . को मुस्लिम लीग की सीधी कार्यवाही के परिणामस्वरूप देश में भयंकर हिन्दू - मुस्लिम दंगे हुए । इस रक्तपात को देखकर कांग्रेस ने विभाजन स्वीकार कर लिया ।
( 5 ) कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति - कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति के कारण भी देश का विभाजन हुआ । यदि प्रारम्भ से ही कांग्रेस , मुस्लिम लीग के प्रति कठोर नीति अपनाती तो संभवत : लीग का उत्साह ठंडा पड़ गया होता ।

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