सामाजिक विज्ञान इतिहास कक्षा सातवीं
अध्याय –7. विरोध और विद्रोह का समय
अभ्यास के प्रश्न
प्रश्न 1. सही गलत बताइये–
( 1) औरंगजेब के उत्तराधिकारी शक्तिशाली शासक थे । (गलत)
( 2 ) बीजापुर और गोलकुंडा राज्य में पराग सरदारों को ऊँचे पद मिले हुए थे । ( सही)
( 3 ) शाहजहाँ के बीमार होते ही उनके पुत्रों में आपस में युद्ध होने लगा( सही)
( 4 ) औरंगजेब के शासनकाल में मुगल साम्राज्य का अधिक विस्तार नहीं हुआ।(गलत)
( 5 ) मथुरा के पास बुन्देलों का विद्रोह हुआ।( गलत)
प्रश्नों के उत्तर दीजिए
प्रश्न 1. औरंगजेब की दो बड़ी समस्याओं को अपने शब्दों में लिखिए?
उत्तर- औरंगजेब को दो बड़ी समस्याएँ निम्न थी –( ए किसानों व जमीदारों का विद्रोह - औरंगजेब के काल में किसानों की हालत काफी बिगड़ने लगी थी । साम्राज्य का आर्थिक भी उन्हों पर पड़ रहा था ऊपर से ताजमहल के निर्माण का खर्च भी किसानों पर थोप दिया गया । परिणाम यह हुआ कि ज्यादा लगाच होने के कारण किसान गाँव छोड़कर चले जाते या विद्रोह करते थे । औरंगजेब के समय कई विद्रोह हुए । जसमें किसान सक्रिय थे । जैसे- मथुरा के पास जाटों का विद्रोह , पंजाब के सतनामी पंथी व सिक्खों का विद्रोह , मुन्देलखण्ड के बुन्देलों का विद्रोह आदि । इनमें आमतौर पर स्थानीय जमींदारों ने किसानों का साथ दिया । मुगल सामान की जड़ें हिलाकर रख दी ।
( 2 ) जागीरों की कमी - मुगल शासन में अधिकारियों की संख्या बढ़ती जा रही थी । लेकिन सभी अमीरों के लिए जागीर नही था। जागीरों की कमी के कारण जागीरदारों में असंतोष और अनुशासनहीनता बढ़ने लगी । जागीरदारों के सामने आए संकट का भी दबाव था । जागीरदारों का तबादला और जागीरदारी छीने जाने का भय भी असंतोष का प्रमुख कारण था ।
( 2 ) औरंगजेब ने जागीर की समस्या को दूर करने के लिए कौन कौन से उपाय किए ?
उत्तर - औरंगजेब के सामने जागीर की कमी से निपटने खेती को बढ़ावा देने और राज्य विस्तार दो रास्ते थे । पहले विकल्प पर जागीरदार रुचि नहीं लिए । तब औरंगजेब ने अहोम राज्य पर आक्रमण किया और उसे अपने राज्य में मिला लिया । मीर जमुला के मरने के बाद असम ( अहोम ) मुगलों के हाथों से निकल गया । मुगल साम्राज्य के दक्षिण में दो महत्वपूर्ण राज्य बीजापुर और गोलकुटा थे । औरंगजेब ने सन् 1687 तक इन दोनों राज्यों को पराजित कर अपने राज्य में मिला लिया । औरंगजेब जीत तो गया था लेकिन उसे जल्दी ही पता चल गया कि बीजापुर तथा गोलकुंडा को जीतने से उसकी कठिनाइयाँ बढ़ गयी । यह औरंगजेब के जीवन का आखिरी और सबसे कठिन समय था । इस प्रकार इस विजय से कोई खास फायदा नहीं हुआ और पुराने अधिकारियों के लिए जागीरों की कमी बनी रही ।
( 3 ) मराठों की सेना मुगलों की सेना को किस प्रकार हरा पाती थीं ?
उत्तर - मुगलों की सेना से लड़ने का उनका ( मराठों का ) तरीका अनोखा था । वे मुगलों से सीधा युद्ध न करके उन पर अचानक तेजी से युद्ध करते थे और नुकसान पहुँचाकर वापस पहाड़ी किलों में छिप जाते थे । इस युद्ध को छापामार युद्ध कहते हैं । युद्ध के इस तरीके से वे बड़ी से बड़ी सेना को भी हरा सकते थे । यही कारण था कि मुगाल सैना , मराठी सेना से हार जाती थी ।
( 4 ) मुगल साम्राज्य के पतन के लिए आप औरंगजेब को कहाँ तक उत्तरदायी मानते हैं ? ( अथवा ) मुगल सामान्य के पतन के क्या कारण थे ?
उत्तर - मुगल साम्राज्य के पतन के लिए औरंगजेब निश्चित रूप से उत्तरदायी था , उसके निम्न कार्यों से समृद्धि और सुदृढ़ साम्राज्य ताश की पत्तों की तरह ढह गया
( 1 ) मुगल साम्राज्य का बड़ा होना - इसके कारण पूरे साम्राज्य पर नियंत्रण करना कठिन कार्य हो गया था । साम्राज्य छिन्न - भिन्न हो गया ।
( 2 ) शहजादों में संघर्ष - सत्ता के लिए बादशाह के पुत्रों में संवर्ष होता रहा ।
( 3 ) दोषपूर्ण सैन्य व्यवस्था - सेना के रख - रखाव तथा विकास पर ध्यान नहीं दिया ।
( 4 ) औरंगजेब की धार्मिक नीति - वह कट्टर धार्मिक मुसलमान था । हिन्दुओं पर उन विश्वास नहीं था । उसने जजिया कर हिन्दुओं पर पुन : लगा दिया
( 5 ) विद्रोह - औरंगजेब की नीतियों से असंतुष्ट होकर सिक्खों , जाटों , राजपूतों , सतनामियों ने मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था।
( 6 ) औरंगजेब की दक्षिण भारत नीति - दक्षिण भारत के राज्यों में ज्यादा ध्यान देने से उत्तर भारत में उसकी पकड़ ढीली पड़ गयी।
(7 ) निर्बल उत्तराधिकारी -औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी अयोग्य , निर्बल एवं निकम्मे थे । इससे मुगल सामान्य नष्ट हो गया ।
( 8 ) विलासी बादशाह - विलासी , अयोग्य , अदूरदर बादशाहों के फिजूलखर्ची से राजकोष खाली हो गया और साम्राज्य नष्ट हो गया।
( 9 ) आर्थिक संकट - शाहजहाँ के शान - शौकत तथा भवन के निर्माण कार्यों में पैसा पानी की तरह बहा तथा अनेक युद्धों धन - जन की हानि हुई ।
( 10 ) औरंगजेब का संदेह- जनक स्वभाव - वह अपने पूत्रों पर भी विश्वास नहीं करता था । उन्हें उसने सैनिक शिक्षा भी नहीं दी जिससे वे अयोग्य रह गए ।
उपर्युक्त कारणों से मुगल साम्राज्य का पतन हुआ ।
( 5 ) औरंगजेब ने हिन्दुओं के विरुद्ध व पक्ष में जो कदम उठाए , इन दोनों बातों के दो - दो उदाहरण दीजिए ।
उत्तर - औरंगजेब द्वारा हिन्दुओं के विरुद्ध उठाए गए कदम–
( 1 ) हिन्दुओं पर जजिया कर फिर से लागू किया ।
( 2 ) हिन्दुओं के प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया ।
पक्ष में उठाए गए कदम
( 1 ) औरंगजेब ने कई हिन्दू मंदिरों व मठों को दान भी दिया था । उज्जैन के महाकाल मंदिर और चित्रकूट के राममंदिरों में ऐसे दान के आदेश आज भी देखे जा सकते है ।
( 2 ) उसके दरबार के सर्वोच्च पदों पर जयसिंह और जसवंत सिंह जैसे हिन्दू थे । उसके राज्य में हिन्दू अमीरों की संख्या 98 ( शाहजहाँ के समय ) से बढ़कर 182 हो गई थी ।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. औरंगजेब के शिवाजी के साथ संबंधों पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर - औरंगजेब में अपने पूर्वजों के समान धार्मिक उदारता नहीं थी वह कट्टर मुसलमान शासक था । शिवाजी की बढ़ती हुई शक्ति को देखकर औरंगजेब ने दक्षिण के सूबेदार शाइस्ता खां को शिवाजी के खिलाफ भेजा क्योंकि शिवाजी दक्षिण राज्य ( बीजापुर ) के स्वतंत्र शासक बनना चाहता था , परंतु शाइस्ता खां असफल रहा और उसे वहाँ से भागना पड़ा । औरंगजेब ने सन् 1665 में राजा जयसिंह को शिवाजी पर आक्रमण करने भेजा इसमें सफलता मिली और उसने शिवाजी से संधिकर उसे मुगल दरबार में आने को राजी कर लिया । हालांकि आगरा आने पर शिवाजी को औरंगजेब ने कैद कर लिया । लेकिन वे वहां से भागने में सफल रहे । दक्षिण पहुंचकर शिवाजी ने सन् 1674 में स्वयं को मराठा राज्य का स्वतंत्र शासक घोषित कर मराठा राज्य स्थापित किया । उसने औरंगजेब से कभी हार नहीं मानी और सन् 1680 में शिवाजी को मृत्यु हो गई ।



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