दिव्यांग बच्चों के लिए आशा की किरण बनी ऑडियो बुक पहल एवं ब्रेल बुक पहल—शारदा मैम का प्रेरणादायक योगदान

दिव्यांग बच्चों के लिए आशा की किरण बनी ऑडियो बुक पहल एवं ब्रेल बुक पहल—शारदा मैम का प्रेरणादायक योगदान


पामगढ़ | दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विशेष आवासीय विद्यालय, पामगढ़ का  दौरा एक अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव रहा। परीक्षा समाप्त होने के कारण बच्चों से भेंट नहीं हो सकी, क्योंकि वे सभी अपने-अपने घर लौट चुके थे, फिर भी विद्यालय का वातावरण और वहाँ चल रहे प्रयासों ने मन को गहराई से स्पर्श किया।

विद्यालय में वहाँ के संचालक श्री दूजेराम ज्योति जी से भेंट हुई, जो राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी हैं। उन्होंने आदरणीया शारदा मैम के मार्गदर्शन में संचालित ऑडियो बुक निर्माण कार्य को अत्यंत सराहनीय पहल बताया। उनके अनुसार, यह ऑडियो बुक एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है, जहाँ आवश्यक शैक्षणिक सामग्री एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर सरल और सुलभ रूप में उपलब्ध हो रही है। यह न केवल दृष्टिबाधित बच्चों के लिए, बल्कि सामान्य विद्यार्थियों एवं समाज के हर वर्ग के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

इसके साथ ही उन्होंने ब्रेल पुस्तक पहल की भी विशेष सराहना करते हुए कहा कि ब्रेल पुस्तकें दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक एवं सुलभ माध्यम हैं। इनके माध्यम से बच्चे न केवल पढ़ाई से जुड़े रहते हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय में औपचारिकता निभाने के उद्देश्य से आने वाले लोग तो बहुत होते हैं, किन्तु वास्तव में बच्चों के हित में सोचकर समर्पण के साथ कार्य करने वाले लोग बहुत कम होते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने शारदा मैम के कार्यों की विशेष सराहना की।

दौरे के दौरान शारदा मैम द्वारा दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई ब्रेल पुस्तक भी उन्हें भेंट की गई, जिसकी उन्होंने अत्यंत प्रशंसा की। उन्होंने इसे बच्चों के लिए उपयोगी, प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए इस पुनीत कार्य के लिए मैम के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह संपूर्ण अनुभव अत्यंत संतोषप्रद एवं प्रेरणादायक रहा। ऑडियो बुक के माध्यम से ज्ञान को “सुनने योग्य” बनाकर एक नई दुनिया का सृजन किया जा रहा है, जिसमें संवेदनाएँ, समर्पण और सेवा की सच्ची भावना स्पष्ट झलकती है। हर एक ऑडियो में मेहनत, प्रेम और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव परिलक्षित होता है।

शारदा मैम वास्तव में प्रेरणा की जीवंत प्रतिमा हैं। स्वयं 80% दिव्यांग होते हुए भी उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक परिश्रम से 1000 से अधिक ऑडियो बुक तैयार की हैं, वहीं उनकी पूरी टीम द्वारा 5300 से अधिक ऑडियो बुक का निर्माण किया जा चुका है, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हौसलों से बड़ी नहीं होतीं। उनका मार्गदर्शन न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर कुछ कर दिखाने की प्रेरणा भी जागृत करता है।

निस्संदेह, यह पहल समाज के लिए एक उज्ज्वल दिशा और दिव्यांग बच्चों के लिए एक सशक्त आधार बनकर उभर रही है।

     श्रीमती ज्योति सराफ व्याख्याता ( वाणिज्य)

       जिला- जांजगीर चांपा

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