हिंदी कक्षा 7वीं पाठ 10 सितारों से आगे

 पाठ 10

सितारों से आगे - लेखक मंडल


अभ्यास

प्रश्न 1. विश्व के लोग टेलीविजन पर आँखें क्यों गड़ाए

हुए थे?

उत्तर- विश्व के लोग टेलीविजन पर इसलिए आँखें गड़ाए हुए थे क्योंकि उस दिन कोलंबिया शटल पृथ्वी पर लौटने वाली थी। इसमें सात वैज्ञानिक सवार थे, जिसमें भारत की बेटी कल्पना चावला भी शामिल थी।

प्रश्न 2. टैगोर बाल निकेतन करनाल के बच्चे किसका

और क्यों इंतजार कर रहे थे ?

उत्तर- टैगोर बाल निकेतन करनाल के बच्चे अपने विद्यालय की पूर्व छात्रा कल्पना चावला के अंतरिक्ष से सकुशल वापस लौटने का इंतजार कर रहे थे।

प्रश्न 3. विश्व में शोक की लहर क्यों दौड़ गई ?

उत्तर- विश्व में शोक की लहर इसलिए दौड़ गई क्योंकि

1 फरवरी, 2003 का वह काला दिन जब स्पेस शटल तथा उसमें सवार सात अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर के क्षत-विक्षत अंग अमेरिका की धरती पर इधर-उधर बिखर गए।

प्रश्न 4. कल्पना खुले आसमान को क्यों निहारती थी ?

उत्तर-कल्पना खुले आसमान को इसलिए निहारती क्योंकि उसे ग्रह, नक्षत्र और तारागणों में विशेष रुचि थी। निहारते-निहारत वह नक्षत्र लोक में पहुंच जाती थी। शायद यही से उसे अंतरिक्ष यात्रा की सूझी थी।

प्रश्न 5. कल्पना का अटल ध्येय क्या था?

उत्तर- कल्पना का अटल ध्येय अंतरिक्ष में उड़ने का था।

प्रश्न 6. 'जो काम लड़के कर सकते हैं वह मैं भी कर

सकती हूँ', कल्पना चावला यह क्यों कहती थी?

उत्तर - कल्पना चावला ने इंजीनियरिंग में 'अन्तरिक्ष विषय' लिया था। इस विभाग में उस समय तक कम ही छात्र-छात्राएँ दाखिला लेते थे। छात्राओं का प्रतिशत तो नगण्य ही रहता था।अध्ययन के समय कल्पना अपने विषय के अलावा अन्य क्रिया कलापों में भी भाग लेती थी। यह उसका दृढ़ विश्वास था, जिसके कारण वह कहा करती थी कि जो काम लड़के कर सकते हैं, वह मैं भी कर सकती हूँ।

प्रश्न 7. मोंट्यू फांउडेशन का उद्देश्य क्या है ?

उत्तर- मोंट्यू फांउडेशन का उद्देश्य है प्रतिभावान नवयुवकों और नवयुवतियों को जिन्हें धनाभाव के कारण उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ता है, विश्वविद्यालय की शिक्षा प्राप्त करने में सहायता करना।

पाठ से आगे

प्रश्न 1. कल्पना चावला को भारत की बेटी क्यों कहा

गया है ? इस विषय पर आप अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कर उनकी विशेषताओं को लिखिए।

उत्तर-कल्पना चावला को भारत की बेटी इसलिए कहा

गया है क्योंकि उनका जन्म भारत में हुआ था, स्कूली शिक्षा भारत में हुई थी और अंतरिक्ष यात्रा अभियान में शामिल होकर भारत देश का नाम रोशन किया।

भारत  की बेटी

नासा ने 1994 में उन्हें संभावित अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में चुना. कल्पना ने मार्च 1995 में जॉन्सन अंतरिक्ष केंद्र में दाखिला लिया।

उन्हें अंतरिक्ष यात्रियों के पंद्रहवें दल में शामिल किया गया. साल भर के प्रशिक्षण के बाद उन्हें अंतरिक्ष यानों की नियंत्रण व्यवस्था की जाँच के काम में लगाया गया।

नवंबर 1996 में घोषणा की गई कि उनके एसटीएस-87 मिशन में विशेषज्ञ की हैसियत से भाग लेने की घोषणा की गई।और साल भर बाद 19 नवंबर 1997 को वह दिन आया जब करनाल की बेटी कल्पना चावला ने अंतरिक्ष के गहन अँधेरे में भारत का नाम रोशन किया।उन्होंने 376 घंटे 34 मिनट अंतरिक्ष में बिताए. कई महत्वपूर्ण प्रयोगों को अंजाम देते हुए कल्पना ने तब धरती के 252 चक्कर लगाए यानि 65 लाख मील की दूरी तय की।

मिशन विशेषज्ञ कल्पना

अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा ने अपने विशुद्ध अनुसंधान उद्देश्यों के लिए भेजे गए अंतरिक्ष मिशन में भारतीय मूल की महिला कल्पना चावला को भी शामिल किया था।

नासा ने न सिर्फ़ दूसरी बार कल्पना को अंतरिक्ष में भेजने का फ़ैसला किया, बल्कि सात सदस्यीय मिशन टीम में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान भी दिया था।

सोलह दिवसीय मिशन में वह विशेषज्ञ के रूप में शामिल की गईं। नासा के जनवरी 2003 के अभियान एसटीएस-107 के लिए कल्पना को मिशन विशेषज्ञ के रूप में अंतरिक्ष प्रयोगों के लिए चुना गया था।

प्रश्न 2. कल्पना का मानना था कि जो काम लड़के कर

सकते हैं वह मैं भी कर सकती हूँ। आप कक्षा में चर्चा कर लिखिए कि जीवन का ऐसा कौन-सा क्षेत्र है जहाँ लड़किया कार्य नहीं कर सकतीं।

उत्तर-जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ लड़कियाँ  कार्य नहीं कर सकती आज सेना (जल, थल, वायु) के क्षेत्र में,भारत के बार्डर पर सुरक्षा, पायलट, अंतरिक्ष यात्रा, राष्ट्रीय पर्व पर मोटर साइकिल में करतब आदि सभी क्षेत्रों में लड़कियाँ कार्य कर रही हैं।

प्रश्न 4.एयरोनाटिक्स इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग का कौन- सा क्षेत्र है और इसमें किस विषय की पढ़ाई होती है ? शिक्षक और साथियों से बातचीत कर लिखिए।

उत्तर- एयरोनाटिक्स इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इसके तहत नागरिक उड्डयन,स्पेस रिसर्च, डिफेंस टेक्नोलॉजी आदि के क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास किया जाता है। यह क्षेत्र डिजाइनिंग निर्माण, विकास परीक्षण, ऑपरेशंस तथा कमर्शियल व मिलिट्री एयरक्रॉफ्ट के पुर्जी के साथ-साथ अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और मिसाइलों के विकास से संबंधित है।


भाषा से

निम्नलिखित समानोच्चारित शब्दों को इस प्रकार वाक्यों

में प्रयोग कीजिए, जिससे उनके अर्थ में अंतर स्पष्ट हो जाए-

उत्तर-

शब्द   -  अर्थ

1. साहस - हिम्मत

सहसा- अचानक

2.परिणाम-फल (रिजल्ट, निष्कर्ष)

परिमाण- माप

3. दिन- वार

दीन- दुखी

4. अपेक्षा - आशा ,तुलना

उपेक्षा- तिरस्कार,निरादर

5. श्वेत- सफेद

स्वेद- पसीना

6. अनु- पीछे

अणु- कण


वाक्य प्रयोग

उत्तर-

1. सहसा/साहस

(i) सहसा जोरदार धमाका हुआ।

(ii) कल्पना का साहस सराहनीय है।

2. परिणाम/परिमाण

(6) उस विद्यालय का परिणाम उत्तम रहता है।

(ii) इसका परिमाण लगभग 100 किलोग्राम है।

3. दिन/दीन

(i) आज कौन-सा दिन है।

2 वह बहुत ही दीन बालक है।

4. अपेक्षा/उपेक्षा

1. बड़े लोगो की अपेक्षा सर्वसाधारण में यह किस्सा अधिक लोकप्रिय है।

2.  नारी पूजा की वस्तु है उपेक्षा की नही।

5. श्वेत/स्वेद

(¡) उसके श्वेत केश से उसकी उम्र का अनुमान लगाया जा

सकता है।

(ii) अति श्रम के कारण उसके चेहरे से स्वेद बिन्दु टपक रहे थे।

6. अनु/अणु

(i) लक्ष्मण रामजी के अनुचर थे।

(ii) सोना को आग में तपाने से उसके मिलावट के अणु-अणु बिखर जाते हैं।

प्रश्न 2. पाठ में निम्नांकित मुहावरों का प्रयोग हुआ है

वाक्य में स्वतंत्र रूप से इसका इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि उनका अर्थ स्पष्ट हो जाए-

उत्तर- 1. आँखें गड़ाना - एकटक देखना।

राम चांद को आँखे गड़ा के देख रहा है।

2. आँखें आकाश की ओर लगाना - ऊँचे ख्वाब देखना।

समीर अपनी आँखें  आकाश की ओर  लगाए रखता है।

3. बलिदान देना- समर्पण।

भारत माता के वीर सपूत देश के लिए अपना बलिदान दे देते है।

4. साँस ऊपर की ऊपर रह जाना- अवाक रह जाना।

भारत की ओर से युवराज के 6 छक्के  देखकर दर्शकों के  आसाँस ऊपर की ऊपर ही रह गया।

5. शोक की लहर दौड़ना- अत्यंत दुख।

अटल जी की निधन की खबर सुनकर देश में शोक की लहर दौड़ गयी थी।

6. मन माँगी मुराद पूरी होना- इच्छा पूरी होना

आर्मी बनकर राकेश की मन की मुराद पूरी हो गयी।

प्रश्न 3. पाठ में आतुरता, सफलता, प्रमुखता, असमानता

जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है जिसमें मूलशब्द के साथ 'ता' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। आप 'ता' प्रत्यय को जोड़ते हुए दस शब्दों का निर्माण कीजिए।

उत्तर- 1. समानता, 2. निर्धनता, 3. अधीरता, 4. सुंदरता, 5.पराधीनता, 6. स्वतंत्रता, 7. मानवता, 8. सहभागिता, 9. उदण्डता,10. सफलता।


योग्यता विस्तार

1. स्त्री शक्ति के रूप में भारत का नाम विभिन्न क्षेत्रों में रोशन करने वाली नारियों की सूची बनाइए और कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर- (1) कल्पना चावला, (2) सानिया मिर्जा, (3) पी. टी.उषा, (4) साक्षी मलिक, (5) दीपा कर्माकर, (6) एमसी मैरीकॉम,(7) चंदा कोचर, (8) इरोम चामू शर्मिला, (9) पी. वी, सिंधु,(10) दीपा मलिक, (11) साइना नेहवाल।

2. भारत की प्रथम महिला एवरेस्ट विजेता बछेन्द्री पाल

की जीवनी खोज कर पढ़िए।

उत्तर- बछेन्द्री पाल का जन्म 24 मई सन् 1954 को नाकुरी उत्तरकाशी (उत्तरांचल) में हुआ। बछेन्द्री पाल के पिता का नाम किशन सिंह पाल तथा माँ का नाम हंसा देवी है। बचपन से ही बछेन्द्री पाल अन्य बालकों से सदैव अलग थी। बछेन्द्री निडर व आत्मनिर्भर रहना पसंद करती थी। बछेन्द्री पाल को पहाड़ों पर चढ़ाई का मौका तब आया जब 12 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने सहपाठियों के ग्रुप के साथ 4000 मीटर की चढ़ाई की। बछेन्द्री जब 13 वर्ष की हुई तो उन्हें गढ़वाल की अन्य बालिकाओं की भाँति स्कूल छोड़कर घर का काम सीखने की सलाह दी गई लेकिन वह अपने दृढ़ निश्चय के कारण रात-रात भर पढ़ाई करने लगी। तब उनके घरवालों को उनकी शिक्षा के प्रति झुकाव का एहसास हुआ और बछेन्द्री पाल को शिक्षा पूरी करने की अनुमति प्रदान कर दी। कॉलेज में बछेन्द्री राइफल, शूटिंग और अन्य प्रतियोगिता में लड़के व लड़कियों को हरा दिया। बछेन्द्री ने संस्कृत में एम. ए. किया और बी. एड. किया। बछेन्द्री अपने गाँव की पहली लड़की थी जिसने इतनी ऊँची डिग्री प्राप्त की।बछेन्द्री ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिले के लिए आवेदन कर दिया। उन्हें इस पाठ्यक्रम का सर्वश्रेष्ठ छात्र माना गया। बछेन्द्री को आश्चर्य तब हुआ जब उन्हें बताया गया कि वह एवरेस्ट जा सकने में सक्षम है और वह चढ़ाई कर सकती है। 23 मई सन् 1984 को बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की चोटी 29028 फीटअर्थात् 8848 मीटर की चढ़ाई करके दोपहर एक बजकर सात मिनट पर एवरेस्ट पर भारतीय विजय पताका फहरा दी। 

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