नागरिक शास्त्र कक्षा आठवीं अध्याय 10 सूचना का अधिकार

अध्याय 10  सूचना का अधिकार



 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. खाली स्थान भरिए-

(1) सूचना के अधिकार का अधिनियम 2005

में बनाया गया।

(2) गलत जानकारी देने वाले कार्यालय को 25000₹ जुर्माना हो सकता है।

(3) न्यूनतम मजदूरी कलेक्टर तय करती है।

प्रश्न 2. प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(1) सरपंच से जानकारी नहीं मिलने पर मजदूरों ने क्या किया?

उत्तर सरपंच से जानकारी नहीं मिलने पर मजूदरों ने हबीब और रामू की मदद से सूचना के अधिकार के कानून का उपयोग

करते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को उचित कार्यवाही के लिये आवेदन पत्र दिया।

(2) यदि सरपंच समझौता नहीं करता तो क्या किया जा सकता था?

उत्तर- जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मजदूरों की शिकायत पर सरपंच के कार्यों की समीक्षा की और

उसके व्यय पत्रक को भी देखा जिसमें गड़बड़ी साबित हो चुकी थीं। यदि सरपंच अपनी गलती मानते हुए समझौता न करता तो उसे सरपंच पद से बर्खास्त किया जाता और उसके खिलाफ अनियमितता और धोखाधड़ी का मामला पुलिस में दर्ज करायाजाता। जुर्म साबित हो जाने पर सरपंच को जेल की हवा खानी पड़ती।

(3) सरपंच से समझौता करने का निर्णय किसने लिया और क्यों?

उत्तर- सरपँच ने समझौता का प्रस्ताव मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मजदूरों के सामने रखा ।सरपँच अपनी गलती मान चुका था। वह बार-बार अपनी गलती पर माफी माँग रहा था और सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी सभी को देने को भी तैयार था।सरपंच के इस तरह की दीनता को देखकर सारे मजदूर ने एक साथ समझौता करने का निर्णय लिया। वे चाहते थे कि सरपंच की आँखें खुल जाय और उन्हें उनका अधिकार मिल जाय और ये दोनों बातें पूरी हो गयी थीं।

(4) सूचना का अधिकार के अंतर्गत जानकारी प्राप्त करने की विधि क्या है?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत जानकारी प्राप्त करने के लिए जिस संस्था या कार्यालय से जानकारी प्राप्त करनी है, उसको लिखित रूप में आवेदन देना होता है। आवेदन के साथ 10% का आवेदन शुल्क जमा करना होता है।इस शुल्क की रसीद आवेदक को प्राप्त कर लेनी चाहिए। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्ति को शुल्क नहीं देना पड़ता।

  आवेदन के तीस दिन के अन्दर चाही गई, जानकारी सम्बन्धित कार्यालय द्वारा दी जाती है। जानकारी के अंतर्गत यदि किसी प्रकार के कागज की छाया प्रतियाँ दी जा रही हों तो छाया प्रति का शुल्क जमा करना होता है। राशि देते समय रसीद प्राप्त कर लेना आवश्यक है। शुल्क का भुगतान चालान द्वारा भी किया जा सकता है।

(5) सूचना का अधिकार के अंतर्गत आवेदन करने की कितने दिनों के अंदर सक्षम अधिकारी को जानकारी देना अनिवार्य है?

उत्तर- सूचना का अधिकार के अंतर्गत आवेदन करने के तीस दिनों के अंदर सक्षम अधिकारी को जानकारी देना अनिवार्य

है।

परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 खाली स्थान भरो-

(1) सरपंच ने पुरुषों के लिये 50 रुपए मजदूरी तय किया था।

(2) सरकार द्वारा तय मजदूरी को न्यूनतम कहते हैं।

(3) मजदूरों ने सूचना के अधिकार अधिकार के तहत आवेदन किया था।

(4) आवेदन के लिए   शुल्क 10  रुपये हैं।

(5) चाही गई जानकारी 30 दिनों के भीतर दिया जाना आवश्यक है।

(6) जुर्माने से प्राप्त राशि आवेदक को दिया जाता है।

(7) जनपद के सबसे बड़े सरकारी कर्मचारी को मुख्य कार्यपालन अधिकारी/सीईओ कहते  हैं।

(8) सूचना के अधिकार का उद्देश्य सरकारी कामों में पारदर्शिता लाना है।

प्रश्न 2.न्यूनतम मजदूरी या कलेक्टर रेट से क्या आशय है?

उत्तर-राज्य सरकार द्वारा प्रशिक्षित, अप्रशिक्षित व कुशल-अकुशल मजदूरों के लिये न्यूनतम पारिश्रमिक (मजदूरी) तय कीजाती है, जिसे सम्बन्धित जिले के कलेक्टर द्वारा प्रसारित किया जाता है, अतः इसे कलेक्टर रेट या न्यूनतम मजदूरी कही जातीहै। इस निर्धारित दर से यदि मजदूरों को कम मजदूरी दिया जाता है तो विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की व्यवस्था की गई है।

प्रश्न 3.एक ही जैसे काम के लिए औरतों को आदमियों से कम मजदूरी देना उनके किस मौलिक अधिकार का उल्लंघन है?

उत्तर-शोषण के विरुद्ध अधिकार।

प्रश्न 4.सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य लिखिए।

उत्तर-सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य निम्नलिखित

(1) लोकतांत्रिक आदर्शों को प्रमुख मानते हुए यह माना गया कि नागरिक जो सूचना या जानकारी चाहते हैं, उन्हें अवगत कराना सरकार तथा उनके माध्यमों का कर्तव्य है।

(2) पारदर्शिता तथा जवाबदेही नागरिकों के प्रति जन विश्वास एवं जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

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