इतिहास कक्षा सातवीं अध्याय 6 मुगल साम्राज्य की स्थापना (बाबर से अकबर तक सन् 1526 से 2605)

  सामाजिक विज्ञान कक्षा -सातवीं

 अध्याय 6. मुगल साम्राज्य की स्थापना

(बाबर से अकबर तक सन् 1526 से 2605)

 अभ्यास के प्रश्न 

प्रश्न 1.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

(1)मुगल साम्राज्य के सभी अधिकारियों को मनसबदार कहा जाता था ।

( 2 ) अकबरनामा के लेखक अबुलफजल हैं।

( 3 ) प्रत्येक मनसबदार को घुड़सवारों की एक टुकड़ी रखनी पड़ती थी ।

(4) मनसबदारों को वेतन जागीर के रूप में मिलता था ।

( 5 ) ताँबे के बने सिक्के को दाम कहते हैं व चांदी के बने सिक्के को रुपया कहते हैं ।

प्रश्न 2. सही / गलत बताएँ

( 1 ) अकबर की व्यवस्था में किसानों को लगान अनाज के रूप में देना पड़ता था ।(गलत)

( 2 ) अधिकारी किसान के बोए गए जमीन नापकर लगान तय करते थे । (सही)

( 3 ) किसान को अपनी उपज का एक चौथाई भाग लगान के रूप में देना पड़ता था ।( गलत)

( 4 ) लगान इकट्ठा करने में अधिकारियों की मदद जमींदार करते थे । ( सही)

प्रश्न 3. प्रश्नों के उत्तर लिखिए–

( 1 ) बाबर के जीवन के बारे में हमें किस स्रोत से पता चलता है ?

उत्तर - बाबर के जीवन के बारे में हमें उसके द्वारा लिखित आत्मकथा ' तुजुक - ए - बाबरी ' से पता चलता है । इसे बाबरनामा भी कहते हैं । 

( 2 ) हुमायूँ को भारत छोड़कर क्यों जाना पड़ा ? 

उत्तर - हुमायूँ , शेरशाह से युद्ध में हार गया और उसे सन् 1540 में भारत छोड़कर ईरान भागना पड़ा ।

( 3 ) क्या छत्तीसगढ़ अकबर के राज्य के अंदर था ?

उत्तर - छत्तीसगढ़ अकबर के राज्य के अंदर नहीं था । छत्तीसगढ़ उस समय रतनपुर राज्य कहलाता था । यहाँ पर कल्चुरी राजवंश का प्रशासन प्रभावशील था ।

( 4 ) बाबर ने भारत में कौन - सी कला को विकसित करने की पहल की ?

उत्तर — बाबर सुंदर बगीचों का शौकीन था । उसने भारत में मुगल शैली के कई बाग बनवाए ।

( 5 ) राणा प्रताप ने अकबर की अधीनता क्यों नहीं स्वीकार की ?

उत्तर - राणा प्रताप को मुगल दासता ( गुलामी ) स्वीकार नहीं होने के कारण उसने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और पुनः आक्रमण कर अपने राज्य को प्राप्त करने में सफलता भी अर्जित किया । 



( 6 ) प्रायः लोग अकबर की किन नीतियों से ज्यादा प्रभावित हुए होंगे ?

उत्तर - अकबर द्वारा लागू दो नीतियों से सर्वाधिक लोग प्रभावित हुए तथा उसे सबका समर्थन मिला । 

1. सब के प्रति शांति ( सुलह कुल )

 2. सर्वधर्म समभाव ( दीन - ए - इलाही ) ।

( 7 ) मनसबदारों की नियुक्ति कौन करता था ?

 उत्तर - मनसबदारों की नियुक्ति खुद बादशाह करता था । 

( 8 ) मनसबदारों का तबादला क्यों होता था ? 

उत्तर - मनसबदारों का समय - समय पर तबादला कर दिया जाता था ताकि वे स्थानीय लोगों से मिलकर विद्रोह न करें ।

( 9 ) अकबर की धार्मिक नीति का वर्णन कीजिए । 

उत्तर - अकबर ने हिन्दू मुस्लिम एकता स्थापित करने के लिए ' दीन ए इलाही ' धर्म की स्थापना की । इसके लिए उसने कई धर्मों के गुरुओं से उनके धर्म की चर्चा के , फलस्वरूप उसके मन में यह धारणा बनी की सभी धर्मों में सच्चाई व अच्छाई है । दुनिया में विविधता , अलग - अलग संस्कृति व धर्म , ईश्वर की ईच्छा से बने हैं । इसी नीति के अनुकूल अकबर ने हिन्दुओं पर लागू जजिया व तीर्थ यात्रा कर हटा दिया । मंदिर बनाने की अनुमति दी और हिन्दू व जैन मंदिरों व मठों को दान दिया । उसने रामायण , महाभारत जैसे ग्रंथों का फारसी में अनुवाद करवाया । अकबर ने अपने निजी जीवन में भी कई धर्मों की बातों का समावेश किया । वह रोज सूर्य की पूजा करता था , मांस - मदिरा आदि का उपयोग कम करने लगा और दीवाली , नौरोज जैसे त्यौहारों को मानता था । उसकी इस नीति को मुगल साम्राज्य के सभी लोगों का समर्थन मिला ।

( 10 ) अकबर की लगान व्यवस्था की विशेषताएँ बताइये ।

उत्तर - अकबर की लगान व्यवस्था की विशेषताएँ निम्न हैं

1. किसान लगान रुपए में दें न कि अनाज के रूप में । इससे छोटे अधिकारी व जमींदारों की मनमानी जाती रही । 

2. किसान जितनी जमीन में खेती करता था , उसी हिसाब से लगान चुकाना था । आमतौर पर अपने उपज का एक तिहाई या आधा हिस्सा लगान के रूप में देना पड़ता था । 

3. किसानों से लगान इकट्ठा करने में स्थानीय जमींदार अधिकारियों की मदद करते थे । 

4. किसानों से प्राप्त लगान से ही राज्य का खर्च चलता था ।

 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. अकबर ने अपने विशाल साम्राज्य की व्यवस्था किस प्रकार की ? 

उत्तर - अकबर ने अपने विशाल साम्राज्य को पंद्रह सूबों में बाँटा । सूबे का क्षेत्र लगभग आज के प्रदेश जैसा ही था । प्रत्येक सूबा ( प्रांत ) , सरकारों ( जिलों ) में बँटा हुआ था और प्रत्येक सरकार बहुत से परगनों ( तहसीलों ) में विभक्त था । कई गाँवों के समूह को एक परगना कहा जाता था । अकबर ने केन्द्र से लेकर परगना तक जिम्मेदार अधिकारियों को नियुक्त किया । मुगल शासन के इन अधिकारियों को मनसबदार कहा जाता था । इन मनसबदारों के क्षेत्र को जागीर तथा उन्हें जागीरदार भी कहा जाता था ।

प्रश्न 2. शेरशाह ने अपने राज्य को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या - क्या सुधार किए ?

उत्तर- शेरशाह ने अपने राज्य को सुदृढ़ बनाने के लिए कई सुधार कार्य किए । उसके शासन में सड़कें , सरायें और जल व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया ताकि आम जनता को सुविधाएँ प्राप्त हों । जिन्हें अकबर ने भी आगे चलकर अपनाया और आगे बढ़ाया । उसने नये सिक्कों का चलन शुरू किया । पहला था ताँबे का सिक्का , जिसे ' दाम ' कहते थे तथा दूसरा चाँदी का सिक्का था , जिसे रूपया ' कहते थे । उसने सासाराम में अपने लिए मकबरा भी बनवाया । इनके शासन काल में सड़क निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया । 



प्रश्न 3. अकबर की राजपूत नीति का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।

 उत्तर - वैसे तो अकबर एक निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासक था परन्तु अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए उसने उदारवादी नीति अपनायी जिसके अंतर्गत राजपूत नीति भी आती है ।

( 1 ) राजपूतों से वैवाहिक संबंध कायम करना - उसने जयपुर के राजा भारमल की पुत्री मणिबाई के साथ विवाह करके राजपूतों को अपनी ओर मिला लिया ।

( 2 ) राजपूतों को उच्च पद पर नियुक्त किया - उसने भारमल के पुत्र तथा उसके नाती मानसिंह , बीकानेर के रावसिंह , जैसेलमेर के भीमसेन तथा जोधपुर के उदयसिंह को उच्च पदों पर नियुक्त किया तथा उन्हें संतुष्ट किया । 

( 3 ) उदार व्यवहार तथा धार्मिक भावनाओं का आदर अकबर ने अपने अधीन राजपूत राजाओं तथा अधिकारियों के साथ उदार व्यवहार किया । उसने राजपूतों की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचायी । उसने उनके मंदिर तथा मूर्तियाँ नहीं तोड़ी । अकबर ने हिंदू धर्म के आचरण एवं व्यवहार को भी अपनाया । 

प्रश्न 4.अकबर को महान क्यों कहा जाता है ? 

अथवा 

अकबर एक महान राष्ट्रीय सम्राट था , समझाइए । 

उत्तर - अकबर एक महान् राष्ट्रीय सम्राट था , वह 7 बातों से स्पष्ट होता है 

( 1 ) राजनीतिक एकता - अकबर ने भारत के दिल्ली आग में ग्वालियर , अजमेर , जौनपुर , मालवा के प्रदेशों , रणथम्भौर , दिती = के किलों , गुजरात , अहमदनगर , बंगाल तथा बिहार आदि विजय करके विशाल मुगल साम्राज्य की स्थापना की । 

( 2 ) कुशल शासन प्रबंध - अकबर एक कुशल शासकट प्रशासक था । उसने सुव्यवस्थित शासन प्रणाली की स्थापना की थी । देश के सभी प्रांतों में समान कानून लागू किया । मनसबदारी प्रथा भूमि सुधार संबंधी कानून बनाए ।

( 3 ) धार्मिक नीति- अकबर सभी धर्मों का आदर करता था । उसने दीन - ए - इलाही धर्म चलाया । उन्होंने हिन्दुओं को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की । उसने गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया

( 4 ) हिन्दुओं पर लगने वाले जजिया कर एवं यात्री कर समाप्त कर उदारता का परिचय दिया ।

( 5 ) उसने हिन्दुओं के मंदिर एवं मूर्तियों को नहीं तोड़ा ।

( 6 ) राजपूत नीति - उसने राजपूत राजा की कन्या से विवाह कर हिन्दू - मुस्लिम एकता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया तथा अनेक राजपूतों को अपने प्रशासन में उच्च पदों पर नियुक्त किया । 

( 7 ) उसने हिन्दू - मुस्लिम दोनों के लिए एकही न्याय व्यवस्था लागू कर समानता का सिद्धान्त अपनाया । उपर्युक्त कारणों से अकबर को एक महान राष्ट्रीय सम्राट माना जाता है ।

प्रश्न 5. अकबर के दरबार के नौ रत्नों के नाम लिखिए ।

उत्तर - अकबर के दरबार के नौ - रत्न निम्न थे –

( 1 ) अबुल फजल - विद्वान पंडित , सलाहकार और मित्र था ।

( 2 ) फैजी - बड़ा कवि और दार्शनिक था , जिसने भगवट गीता का फारसी में अनुवाद किया था । 

( 3 ) मानसिंह - अनुभवी सेनापति ।

( 4 ) राजा टोडरमल - भूमि का माप करके मालगुजारी निश्चित करने वाला । 

( 5 ) बीरबल - चतुर विद्वान , बुद्धिमान व हाजिर जवाब 

( 6 ) तानसेन- प्रसिद्ध संगीतज , गायक ।

( 7 ) अब्दुर्रहीम- कवि । 

( 8 ) हकीम हुकाम - राजवैद्य । 

( 9 ) मुल्लादोप्याजा - विनोदशील , मसखरा । 



नौ - रत्नों के अलावा अकबर के शासनकाल में सूरदास तुलसीदास , रसखान , केशवदास , अबुल फजल बदायूँ आदि प्रसिद्ध कवि , लेखक एवं साहित्यकार थे ।

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