इतिहास कक्षा छठवीं अध्याय 1 इतिहास और उसके स्रोत history and its sourced/Itihas kya hai/

 इतिहास और उसके स्रोत history and its sourced



दोस्तों  आप सुनते है कि किसी काल में कोई घटना घटी थी  या आप किसी भवन ,स्मारक को देखते हैं तो आपको जानकारी दी  जाती है उसका निर्माण किसने कौन से काल में करवाया।क्या आपने सोचा कि यह बातें जो  प्राचीन काल से संबंधित है किसने बताई या कही होंगी। यह बात हमें पता चली इतिहास से तो चलाये जाने की इतिहास किसे कहते है।

प्राचीन महत्वपूर्ण घटनाएं और जानकारियों का विवरण इतिहास कहलाता है।

या सीधे शब्दों में कह सकते है पुराने समय की बातें जो लिपिबद्ध है ,इतिहास कहलाती है,और उसे पढ़कर या सुनकर हम इतिहास को जान पाते हैं।

अब चलिए जाने की इतिहास की जानकारी के साधन क्या -क्या है?

इतिहास के स्रोत-

प्राचीन ग्रंथ, शैलचित्र, शिलालेख, खुदाई से प्राप्त अवशेष , वस्तु ,भवन और स्मारक , यात्रा संस्मरण।

अब चलिए इन्हें एक- एक कर  विस्तार से समझें-

शैलचित्र


जब आदिमानव पढ़ना- लिखना नहीं जानते थे तो वह अपनी बात  शिलाओं पर चित्र बनाकर कहते थे।

इसके उदाहरण हमें अब भी रायगढ़ के समीप सिंघनपुर और काबरा की गुफाओं में देखा जा सकता है।

शिलालेख

जब मनुष्य  पढ़ना - लिखना सिख गए तो वे  पत्थरों को खोद कर लिखने लगे और अपनी बात पत्थर पर खोदकर कहने लगे इसे ही  शिलालेख कहते हैं। आगे चलकर भोजपत्र,ताड़पत्र, ताम्रपात्र और कागजों का भी प्रयोग लिखने के लिए किया जाने लगा।

इन लेखों को पाली और प्राकृत भाषा में लिखा गया है जिसे हमारे द्वारा नहीं पढ़ा जा सकता।इसे केवल पुरातत्ववेत्ता ही पढ़ सकते हैं। 

आइये जाने पुरातत्ववेत्ता कौन है जाने-

पुरातत्ववेत्ता 

पुरानी बसाहटों के खोजकर उनसे  संबंधित तथ्य  को एकत्रित कर हमें जानकारी देता है।

प्राचीन ग्रंथ

प्राचीन ग्रंथ जैसे- रामायण ,महाभारत इत्यादि ग्रंथ हमें समकालीन राजाओं- महाराजाओं  के समाज, नगर,उनके रीति-रिवाजों उनकी धार्मिक प्रवृत्तियों की जानकारी देते है।

खुदाई से प्राप्त अवशेष

प्राचीन समय की वस्तुएं ,भवन, नगर यहाँ तक की जंतु भी बाढ़, भूकम्प,आंधी,तूफान, में मिट्टी के नीचे दब गए  जिसे पुरातत्ववेत्ता खोजकर  एवं खोदकर  दुनिया को उसके बारे में बताते है।

इन पुराने अवशेषों से हमें उस समय के लोगों के रहन- सहन व जीवन के बारे में पता चलता है।

भवन ,स्मारक और मंदिर



भवन एवं स्मारक,मंदिर भी हमें इतिहास की जानकारी  देते हैं।और पुराने भवन हमें भवन निर्माण कला से भी परिचित कराते हैं।

वस्तु



प्राचीन काल के राजा- महाराजाओं द्वारा निर्मित भवन,औजार,सिक्के,बर्तन,जो चलाये जाते थे ,वे अलग -अलग काल में अलग- अलग राजा- महाराजाओं के द्वारा प्रचलन में लाया जाता था,जो कई वर्षों बाद प्रचलन से बाहर  हों जाती थीं। जिससे हमें पता चलता है कि वह वस्तु कौन से काल और राजा से संबंधित होती है जिद से हमें इतिहास की जानकारी मिलती है।


वस्तु हमे यह जानकारी देते हैं कि घरों में कैसे बर्तन उपयोग किये जाते थे,  बाल संवारने के कंघे कैसे होते थे ,पहनावा कैसा था, भोजन क्या करते थे,किन देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

इतिहास को जानना क्यो आवश्यक है?

 हमें इतिहास से ही मानव की आदिकालीन सभ्यता से अब तक कि प्रगति एवं विकास की जानकारी मिलती है।आदिमानव की क्रमबद्ध उन्नति,पूर्व की सभ्यताओं की सामाजिक, आर्थिक,राजनैतिक स्थिति का ज्ञान हमें इतिहास के द्वारा ही होता है इसलिए हमें इतिहास को जानना आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त इतिहास से हमें आज की हमारी उन्नति के पीछे हमारा लम्बा और महान अतीत  छुपा हुआ है जो हमें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देते है।

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