छत्तीसगढ़ के फसल धान


उद्देश्य- छत्तीसगढ़ के फसल धान की जानकारी देना।
कक्षा- चौथी
विषय- पर्यावरण

आवश्यक सामग्री- ड्राइंग सीट, कलर पेन, पेंसिल, फसल चक्र से संबंधित ब्लू प्रिंट या चित्र।

निर्माण विधि- ड्राइंग सीट को लंबा आयताकार काटना। उसमें ब्लू प्रिंट या चित्र को बारी- बारी से चक्र बनाते हुए चिपकाना और क्रमांक डालकर फसल चक्र के अनुसार उसका नाम लिखना तथा ड्राइंग सीट के नीचे भाग में खेती के काम आने वाले कुछ औजारो के चित्र बनाएंगे।

लाभ- इससे बच्चे सीखेंगे कि छत्तीसगढ़ का प्रमुख फसल धान के पूर्ण रूप से तैयार होने में कौन-कौन सी प्रक्रिया होती है उसको समझ पायेंगे एवं औजारों को भी पहचान पाएंगे।
जैसे-1. बुआई या रोपाई करते हैं।
2. फिर धान उगता है।
3. उसके बाद कटाई किया जाता है।
4.चौथे चरण में खेतो से लाते हैं।
5. मिजाई करते हैं।
6.अंतिम चरण में धान पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है।

धान पर छत्तीसगढ़ी में रचना-

मोर छत्तीसगढ़ के प्रमुख फसल धान हावय,
खून-पसीना बहाके उपजावत हमर किसान हावय।
छत्तीसगढ़ के फसल हर हरियर-हरियर लहलहाथे,
इखरे खातिर मोर छत्तीसगढ़ हर धान के कटोरा कहलाथे।
धान के खेती हर अरबड़ सुख देथे,
किसान मन के मन ल हर लेथे।
किसान हर चीख़ला पानी म मेहनत करथे,
धन्य हे ओखर चोला सर्दी-गर्मी ल नई डरथे।
तब जाके मिलथे बोरा-बोरा धान,
धन्य हे मोर छत्तीसगढ़ के किसान।
धान के निकले चउर के कतका करो बखान,
चीला,सोहारी,खुर्मी, अइरसा बने ऐखर पकवान।
पहिली के किसान नांगर बइला ल संगवारी बनाय रहय,
चटनी बासी खाके जावय अऊ शरीर ल स्वस्थ बनाय रहय।
आज के जमाना म खेती होथे ट्रेक्टर अऊ थ्रेसर से,
विज्ञान के चमत्कार से खुश हावय मुक्त हावय ज्यादा प्रेसर से।
मोर छत्तीसगढ़ के मेहनती किसान हावय,
देश म वोई हर तो सब ले बड़ा धनवान हावय।
आनी-बानी के हावय धान निकले ओमा ले सादा पिसान,
धन्य हे मोर छत्तीसगढ़ के किसान।
मोर छत्तीसगढ़ के माटी हर उगलत हावय सोन सही धान,
जबघर म आथे धान गदगद हो जाथे जमो लइका सियान।

2. मेरे देश के किसान


ऐ मेरे  भारत के मेहनती किसान,
तु है सबसे बड़ा धनवान।
दुनिया मे लाखो अमीर है पर तुझ सा कोई नही, 
पेट की भूख मिटे तुम्हारे उगाये 
अन्न से सोने चाँदी हिरे मोती से नही।
भारत की आत्मा किसान है गांव तुम्हारा निवास है ,
भारतीय संस्कृति और सभ्यता का तुझमे निवास है।
धरती तुम्हारी माता है तू खून पसीना बहाता है ,
कभी वक्त की ऐसी मार पड़े तो भूखा ही सो जाता है।
ना तुम्हे धूप सताती है ना काली घटा डराती है,
डटा रहता है हर मौसम में जब तक फसल नही पकती है।
भारत है कृषि प्रधान देश जीवन का आधार किसान है,
तपस्या, परिश्रम, ईमानदारी लग अदभुत इनकी मिशाल है।
खून पसीना बहाकर करते भारत को हरा-भरा खुशहाल,
सोने जैसा अन्न उगाकर करते भारत माता को मालामाल।
मेरे देश मे ऐसा राज्य है छत्तीसगढ़ कहलाता है,
किसान की मेहनत और लगन के कारण धान का कटोरा कहलाता है।
लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा दिया है,
कृषक को राष्ट्र की आत्मा और अन्नदाता कहा है।

प्रस्तुति- श्रीमती युगेश्वरी साहू
           शा. क. प्रा. शाला पवनी
           वि. ख.- बिलाईगढ़
           जिला- बालौदाबाजर(छ. ग.)

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